बिलासपुर, छत्तीसगढ़ — साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर लगाम कसते हुए बिलासपुर रेंज साइबर थाना और एसीसीयू की संयुक्त टीम ने एक प्रभावशाली कार्रवाई करते हुए साइबर फ्रॉड में प्रयुक्त फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) से जुड़े आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन म्यूल अकाउंट्स के माध्यम से अब तक 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की जा चुकी थी।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
“म्यूल अकाउंट” ऐसे बैंक खाते होते हैं जिनका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। ये खाते अधिकतर अनजान लोगों के नाम पर खोले जाते हैं, जिन्हें पैसों, नौकरी, या निवेश का झांसा देकर फंसाया जाता है।
किस प्रकार हुई कार्रवाई?
आईजी संजीव शुक्ला के निर्देशन और एसएसपी रजनेश सिंह के मार्गदर्शन में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्ययोजना तैयार की गई। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल में रिपोर्टेड संदिग्ध खातों की तकनीकी जांच के बाद पीड़ितों से संपर्क कर साक्ष्य जुटाए गए। इसके आधार पर अलग-अलग टीमों ने दबिश देकर 08 आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी:
- अब्दूल आदिल (21) – तालापारा, ख्वाजानगर
- संदीप श्रीवास (30) – तिफरा, सिरगिट्टी
- विकास केंवट (31) – रतनपुर
- समीर कश्यप (31) – रतनपुर
- कलेश कुमार धिवर (28) – रतनपुर
- नागेश्वर ठाकूर (25) – आदर्श नगर, सिरगिट्टी
- करन सिंह ठाकूर (33) – आदर्श नगर, सिरगिट्टी
- परमेश्वर जायसवाल (21) – हिर्री माईंस, चकरभाठा
तकनीकी सबूतों के आधार पर खुलासे:
जांच में सामने आया कि इन खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, शेयर ट्रेडिंग के फर्जी ऐप, क्रिप्टोकरेंसी निवेश, गूगल रिव्यू टास्क, टेलीग्राम टास्क, और बैंक KYC अपडेट जैसे जालसाज तरीकों में किया जा रहा था।
पुलिस की चेतावनी:
बिलासपुर पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक अकाउंट, मोबाइल सिम, या किसी भी वित्तीय जानकारी को किसी अन्य व्यक्ति को न दें। मनी म्यूल बनना एक गंभीर अपराध है, और इसमें शामिल व्यक्ति पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लग सकता है, भले ही वह अनजाने में ही क्यों न हो।
मनी म्यूल से जुड़े कानूनी खतरे:
- बैंक खाते और संपत्तियों की जब्ती
- जेल या भारी जुर्माना
- भारतीय न्याय संहिता की धारा 3(5) BNS के तहत मुख्य अपराधी के बराबर सजा
नागरिकों के लिए सुझाव:
- अनजान स्रोतों से धन स्वीकार न करें
- संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल बैंक या पुलिस को दें
- किसी के कहने पर खाता या सिम न दें
बिलासपुर पुलिस की यह कार्रवाई एक महत्वपूर्ण कदम है जो साइबर फ्रॉड और मनी म्यूल नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में प्रभावी सिद्ध हो सकती है। यह न केवल अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाएगा, बल्कि नागरिकों को भी जागरूक करने का कार्य करेगा।


