बिलासपुर। कानून का नाम लेकर लोगों को डराना और पुलिस कार्रवाई का भय दिखाकर मोटी रकम वसूलना अब कुछ शातिर तत्वों का नया धंधा बनता जा रहा है। बिलासपुर के तारबाहर थाना क्षेत्र में सामने आए एक मामले ने न केवल आम लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखाया है कि कैसे पुलिस और प्रशासन का नाम लेकर ठगी और उगाही का संगठित खेल खेला जा रहा है।
मामले में तारबाहर पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं। आरोप है कि इन लोगों ने एक युवक को यह कहकर डराया कि उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई हो सकती है और मामले को “सेटल” कराने के लिए पुलिस अधिकारियों को पैसा देना पड़ेगा। इसी बहाने उससे पांच लाख रुपये की मांग की गई।
जानकारी के अनुसार महासमुंद जिले के सरायपाली थाना क्षेत्र के मोहदा निवासी रूपेश पटेल 19 जून को निजी काम से बिलासपुर आया था। इसी दौरान उसका अपनी दो महिला मित्रों के साथ विवाद हो गया और मामला तारबाहर थाने तक पहुंच गया। थाने में मौजूद रूपेश ने घबराकर अपने परिचित सचिन मेहर को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी।
यहीं से कथित उगाही का खेल शुरू हुआ। आरोप है कि सचिन मेहर ने यह जानकारी सुमित देवांगन को दी और दोनों ने मिलकर रूपेश के परिवार से संपर्क किया। परिवार को यह विश्वास दिलाया गया कि मामला गंभीर है और पुलिस अधिकारियों को पैसे देकर ही कार्रवाई से बचा जा सकता है। डर और तनाव में आए परिवार ने एक लाख रुपये सुमित देवांगन के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दिए।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। आरोपियों ने कथित तौर पर लगातार चार दिनों तक फोन कर शेष चार लाख रुपये की मांग जारी रखी और पैसे नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। जब पीड़ित पक्ष को शक हुआ और उन्होंने रकम के बारे में पूछताछ की, तब मामला पुलिस तक पहुंचा।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद तारबाहर पुलिस ने अपराध क्रमांक 209/2026 के तहत धारा 308(2) एवं 3(5) बीएनएस में मामला दर्ज कर जांच शुरू की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देश पर गठित टीम ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपी सुमित कुमार देवांगन (36) निवासी देवांगन मोहल्ला, चांपा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि एक लाख रुपये उसके खाते में आए थे और बाद में उसने वह रकम दूसरे आरोपी के खाते में ट्रांसफर कर दी।
पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। वहीं मामले के अन्य आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
यह घटना कई गंभीर सवाल छोड़ती है। आखिर आम लोगों के मन में पुलिस का डर इतना क्यों है कि कोई भी व्यक्ति “पुलिस अधिकारियों को पैसा देना पड़ेगा” जैसी बात कहकर लाखों रुपये वसूलने की कोशिश कर सकता है? क्या ऐसे गिरोह पहले भी सक्रिय रहे हैं? और कितने लोग डर के कारण बिना शिकायत किए ऐसी उगाही का शिकार बन जाते हैं?
फिलहाल तारबाहर पुलिस की कार्रवाई ने एक आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, लेकिन इस पूरे नेटवर्क की परतें खुलना अभी बाकी है। पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि आखिर इस कथित उगाही रैकेट में और कौन-कौन शामिल है तथा लोगों को डराकर वसूली का यह खेल कब से चल रहा था।


