बिलासपुर। नगर निगम बिलासपुर के जोन क्रमांक-02 तिफरा में सरकारी संपत्तियों के रखरखाव और निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जलप्रदाय शाखा में उपलब्ध कराए गए 75 मोटर-पंपों में से 15 मोटर-पंपों का हिसाब नहीं मिल रहा है। वहीं, लगभग 500 मीटर केबल का रिकॉर्ड भी स्पष्ट नहीं होने की बात सामने आई है। सरकारी सामानों का हिसाब-किताब स्पष्ट नहीं होने से विभागीय व्यवस्था और जिम्मेदार कर्मचारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जोन कमिश्नर ने जलप्रदाय शाखा में प्लेसमेंट सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत रवि सूर्यवंशी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पत्र प्राप्ति के तीन दिनों के भीतर गायब बताए जा रहे मोटर-पंपों और अन्य सामग्रियों का स्पष्ट ब्योरा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। अब देखना यह होगा कि संबंधित कर्मचारी निर्धारित समयसीमा में क्या जवाब देते हैं और निगम प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है।
जोन कमिश्नर द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के अनुसार, जनवरी 2026 से अब तक जलापूर्ति व्यवस्था में स्थापना के लिए कुल 75 मोटर-पंप उपलब्ध कराए गए थे। समीक्षा बैठक के दौरान जब सामग्रियों के रिकॉर्ड और भंडारण कक्ष में जमा सामान का मिलान किया गया, तो केवल 60 मोटर-पंप ही मरम्मत के लिए वापस जमा पाए गए। शेष 15 मोटर-पंपों का हिसाब उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बाकी मोटर-पंप कहां हैं? क्या उन्हें कहीं स्थापित किया गया है, मरम्मत के लिए दूसरी जगह भेजा गया है या उनके हस्तांतरण से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं? इन सवालों का जवाब संबंधित रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकेगा।
मामला सिर्फ मोटर-पंपों तक सीमित नहीं है। लगभग 500 मीटर केबल का भी स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई है। जलप्रदाय शाखा में मोटर-पंप और केबल जैसे संसाधन जलापूर्ति व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में इनकी उपलब्धता, वितरण, उपयोग और वापसी का रिकॉर्ड स्पष्ट होना जरूरी है।
यदि इन सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है, तो उसका विवरण संबंधित अभिलेखों में होना चाहिए। यदि इन्हें किसी दूसरे स्थान पर भेजा गया है, तो हस्तांतरण का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। और यदि सरकारी सामग्री वास्तव में गायब है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना निगम प्रशासन का दायित्व है।
संबंधित कर्मचारी को लेकर पूर्व में भी जेसीबी, पानी के टैंकर और सड़क सुरक्षा रेलिंग जैसी सरकारी सामग्रियों के कथित रूप से बेचे जाने या गायब होने के आरोपों की चर्चा रही है। हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उन पर हुई विभागीय कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
यदि पूर्व में भी इस तरह की शिकायतें दर्ज हुई थीं, तो निगम प्रशासन को उनकी समीक्षा कर यह बताना चाहिए कि उन मामलों में क्या कार्रवाई की गई। बार-बार सरकारी संपत्तियों के हिसाब को लेकर सवाल उठना निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
जोन कमिश्नर ने रवि सूर्यवंशी, प्लेसमेंट सुपरवाइजर, जलप्रदाय शाखा, वार्ड क्रमांक 10, 11 एवं 12, सिरगिट्टी क्षेत्र को नोटिस जारी कर तीन दिनों के भीतर स्पष्ट जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ वैधानिक और विभागीय कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
हालांकि, इस मामले में केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं होगा। निगम प्रशासन को मोटर-पंपों और केबल का भौतिक सत्यापन कराना चाहिए। स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर, मरम्मत संबंधी दस्तावेजों और सामग्री हस्तांतरण के रिकॉर्ड का मिलान किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो सके।
नगर निगम की संपत्तियां सार्वजनिक धन से खरीदी जाती हैं और उनका उद्देश्य जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में 15 मोटर-पंपों और लगभग 500 मीटर केबल का हिसाब स्पष्ट नहीं होना कोई मामूली मामला नहीं है। यह सरकारी संसाधनों के रखरखाव, रिकॉर्ड संधारण और निगरानी व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा करने की मांग करता है।
अब सवाल निगम के जिम्मेदार अधिकारियों से भी है कि क्या वे इस मामले की निष्पक्ष जांच कराकर पूरी स्थिति सार्वजनिक करेंगे या मामला नोटिस और जवाब तक ही सीमित रह जाएगा?
आखिरकार, 75 मोटर-पंपों में से 15 कहां गए और 500 मीटर केबल का हिसाब कहां है? इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। जांच में यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जनता के धन का हिसाब सुनिश्चित करना नगर निगम प्रशासन की जवाबदेही है।


