क्राइमबिलासपुर

शासकीय पट्टे की जमीन को निजी बताकर 45.21 लाख की ठगी! राजस्व न्यायालय में मामला लंबित, फिर भी कर दिया सौदा; सिविल लाइन पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा…

बिलासपुर। जमीन के कारोबार में भरोसे की आड़ में कथित धोखाधड़ी का एक गंभीर मामला सामने आया है। शासकीय पट्टे की भूमि को अपना बताकर 20 एकड़ जमीन का सौदा करने और अलग-अलग माध्यमों से 45 लाख 21 हजार रुपये लेने के आरोप में सिविल लाइन पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जमीन की रजिस्ट्री और सीमांकन कराने का भरोसा देकर रकम ली गई, लेकिन न रजिस्ट्री हुई और न ही जमीन का सीमांकन कराया गया। बाद में जब प्रार्थी ने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई, तो संबंधित भूमि शासकीय पट्टे की निकली। जांच में यह भी सामने आया कि जमीन को लेकर राजस्व न्यायालय में प्रकरण लंबित था।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सैय्यद शमशाद अली (71 वर्ष), निवासी शीतला मंदिर के पास तालापारा, थाना सिविल लाइन, और सोनू उर्फ चंद्रप्रकाश दुबे (42 वर्ष), निवासी कड़ार, थाना चकरभाठा के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले में थाना सिविल लाइन में अपराध क्रमांक 1472/2026 के तहत धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी भादवि में अपराध दर्ज किया गया है।

पुलिस के अनुसार, विजयापुरम कॉलोनी, सरकंडा निवासी दीपक सोनी ने 24 अक्टूबर 2026 को थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि ग्राम धमनी में महर्षि स्कूल रोड, मंगला स्थित नीता डेयरी और गीतांजलि पार्क के पहले लगभग 20 एकड़ भूमि का सौदा शमशाद अली और उनकी पत्नी कमरुनिशा के नाम पर होने की बात कहकर सोनू उर्फ चंद्रप्रकाश दुबे के माध्यम से तय कराया गया था।

इस सौदे के तहत प्रार्थी ने अलग-अलग किस्तों में कुल 45 लाख 21 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर, आरटीजीएस और नकद के माध्यम से दिए। रकम लेने के बाद जमीन का सीमांकन कराकर रजिस्ट्री कराने का भरोसा दिलाया गया। लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी जब रजिस्ट्री और सीमांकन नहीं हुआ, तो प्रार्थी ने जमीन के दस्तावेज मांगे। आरोप है कि इस दौरान उसे लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा।

इसके बाद प्रार्थी ने स्वयं ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई। जांच में संबंधित भूमि शासकीय पट्टे की दिखाई दी। जब उसने इस संबंध में शमशाद अली और सोनू दुबे से सवाल किया, तो रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं होने के कारण जमीन शासकीय दिखाई देने की बात कही गई। प्रार्थी ने पुराने राजस्व रिकॉर्ड की जांच कराई, तो पता चला कि संबंधित भूमि को लेकर राजस्व न्यायालय में मामला लंबित है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जमीन की वास्तविक स्थिति और राजस्व न्यायालय में प्रकरण लंबित होने की जानकारी के बावजूद आरोपियों ने बेईमानी की नीयत से जमीन का सौदा किया और उससे लाखों रुपये वसूल लिए। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।

मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इसके बाद पुलिस टीम गठित कर आरोपियों की तलाश की गई और उनके निवास स्थानों पर दबिश देकर उन्हें हिरासत में लिया गया। पुलिस के मुताबिक, पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया। इसके बाद 26 अक्टूबर 2026 को दोनों को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

45 लाख से अधिक की रकम, 20 एकड़ जमीन और राजस्व न्यायालय में लंबित मामला—इस पूरे प्रकरण ने जमीन की खरीद-बिक्री में दस्तावेजों की जांच की अहमियत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। जमीन खरीदने से पहले उसके स्वामित्व, शासकीय पट्टे की शर्तों, राजस्व रिकॉर्ड और न्यायालय में लंबित विवादों की जांच नहीं करना खरीदार को भारी आर्थिक नुकसान में डाल सकता है।

फिलहाल, सिविल लाइन पुलिस ने मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की है। आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।

error: Content is protected !!
Latest