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बिलासपुर: रायपुर रोड़ से सेक्टर डी वाली सड़क पर कब्जे के मामले में कांग्रेस नेता राजेंद्र शुक्ला और शैलेन्द्र जैसवाल के बीच तीखा टकराव…देखें वीडियो…

बिलासपुर में रायपुर रोड से सेक्टर डी को जोड़ने वाली सड़क पर शुक्रवार को अजीबोगरीब घटना हुई। इस सड़क को एक बिल्डर ने निजी संपत्ति बताकर खुदाई कर दी थी। मामले की सूचना मिलने पर नगर निगम आयुक्त के आदेश पर अतिक्रमण विरोधी दस्ते ने मौके पर पहुंचकर सड़क को फिर से समतल करना शुरू किया। लेकिन इस दौरान स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई, जब कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेता—राजेंद्र शुक्ला और पूर्व पार्षद शैलेन्द्र जायसवाल—आपस में भिड़ गए।

मंडपम के पास स्थित इस सड़क को एक बिल्डर ने अपनी संपत्ति बताते हुए खुदाई कर दी थी। इसके बाद आम जनता ने नगर निगम में शिकायत की, जिसके बाद निगम की टीम कार्रवाई के लिए मौके पर पहुंची। सड़क को फिर से ठीक करने के दौरान दोनों नेता मौके पर पहुंच गए। एक नेता बिल्डर के पक्ष में बात कर रहे थे, जबकि दूसरा नेता जनता के पक्ष में खड़ा था। इसी मतभेद के कारण दोनों के बीच जमकर विवाद हुआ।

मामले ने तब और तूल पकड़ा जब बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच धक्का-मुक्की होने लगी। स्थानीय लोगों और निगम कर्मचारियों की मौजूदगी में यह घटनाक्रम हुआ। मौके पर मौजूद निगम अमले ने बीच-बचाव करते हुए दोनों को शांत किया, जिसके बाद ही सड़क की मरम्मत का काम दोबारा शुरू हो सका।

इस घटना ने कांग्रेस पार्टी के भीतर आपसी समन्वय की कमी को उजागर किया। जहां एक नेता बिल्डर के पक्ष में खड़ा था, वहीं दूसरा नेता जनता के हित में लड़ रहा था। स्थानीय नागरिकों ने इस स्थिति को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि नेताओं के आपसी विवाद ने जनता के मुद्दों को पीछे छोड़ दिया है।

नगर निगम ने स्पष्ट किया कि यह सड़क सार्वजनिक संपत्ति है और इसे निजी संपत्ति बताकर खुदाई करना अवैध है। निगम के अधिकारियों ने कहा कि ऐसी कोई भी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्थानीय लोगों ने इस विवाद को राजनीति का एक शर्मनाक उदाहरण बताया। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “हम यहां सड़क की समस्या को लेकर परेशान हैं और नेता आपस में लड़ रहे हैं। इससे जनता का भला कैसे होगा?”

इस घटना ने न केवल बिल्डर के अवैध कार्यों को उजागर किया, बल्कि कांग्रेस पार्टी के भीतर मतभेद और समन्वय की कमी को भी सामने रखा। यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के विवाद जनता के मुद्दों को हल करने में बाधा बनते हैं। अब देखना यह है कि निगम और प्रशासन इस मामले में किस तरह से कार्रवाई करते हैं और जनता को राहत पहुंचाते हैं।

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