बिलासपुर: नगर निगम चुनावों की सरगर्मियों के बीच वार्ड नंबर 36 (बसंत भाई पटेल वार्ड) की तस्वीर कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही है। यह इलाका, जिसे जूना बिलासपुर या पुराना बिलासपुर भी कहा जाता है, विकास के नाम पर अभी भी पिछड़ा हुआ नजर आता है। गलियों में टूटी-फूटी सड़कें, अव्यवस्थित नालियां, जलभराव की समस्या और असुविधाजनक बिजली-पानी की आपूर्ति से यहां के नागरिक लंबे समय से जूझ रहे हैं।
वार्ड में विकास की स्थिति:
ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में कई स्थान ऐसे हैं, जहां दशकों से कोई ठोस विकास कार्य नहीं हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे यह वार्ड बिलासपुर का हिस्सा न होकर किसी पुराने, उपेक्षित शहर का भाग हो। नागरिकों की बुनियादी जरूरतें जैसे सड़क, नाली, स्वच्छ पेयजल और बिजली की स्थिर आपूर्ति अभी भी चुनौती बनी हुई है।
पूर्व पार्षद का दावा –
कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी संदीप बाजपेयी, जो पूर्व में 2009 और 2014 में पार्षद रह चुके हैं, का कहना है कि जो भी विकास आज इस वार्ड में दिखाई देता है, वह उन्हीं के कार्यकाल का परिणाम है। उनका दावा है कि इसके बाद के वर्षों में वार्ड का कोई विकास नहीं हुआ। उनका यह भी कहना है कि यदि जनता उन्हें दोबारा पार्षद चुनती है, तो वार्ड में व्यापक सुधार किए जाएंगे और इसे व्यवस्थित रूप से विकसित किया जाएगा।
नागरिकों की उम्मीदें और चुनावी मुकाबला
वार्ड नंबर 36 के निवासी इस बार चुनाव में किसी ऐसे प्रतिनिधि का चयन करना चाहते हैं, जो उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं का समाधान कर सके। सड़कें पक्की हो, नालियां सही ढंग से बनाई जाएं, जल निकासी की उचित व्यवस्था हो और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हो – यह सब उनकी प्राथमिक मांगें हैं।
चुनावी माहौल के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि वार्ड के मतदाता किसे अपना जनप्रतिनिधि चुनते हैं और आने वाले समय में इस क्षेत्र की दशा में कोई परिवर्तन होता है या नहीं। फिलहाल, वार्ड नंबर 36 की जनता अपने भविष्य के फैसले को लेकर मंथन कर रही है और इस बार बदलाव की उम्मीद कर रही है।


