बिलासपुर, 4 फरवरी 2025 – आगामी निकाय चुनावों से पहले बिलासपुर में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस शासित नगर निगम पर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलता का आरोप लगाते हुए 14 बिंदुओं का एक आरोप पत्र जारी किया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने कांग्रेस के कार्यकाल की विफलताओं को उजागर करते हुए कहा कि इन पांच वर्षों में नगर निगम की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है, और अब जनता भाजपा को एक बार फिर सत्ता में लाने का मन बना चुकी है।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
आरोप पत्र में सबसे बड़ा मुद्दा 77 लाख रुपये के एफडीआर घोटाले को बताया गया है। भाजपा का आरोप है कि यह घोटाला बिना महापौर की मिलीभगत के संभव नहीं था और इस वित्तीय अनियमितता ने नगर निगम की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके अलावा, निगम की दुकानों के किराए में भी व्यापक घोटाले का आरोप लगाया गया है, जिसमें लाखों रुपये का गबन होने के बावजूद कांग्रेस प्रशासन मूकदर्शक बना रहा।
भूखंडों की नीलामी में धांधली का मामला भी उठाया गया, जिसमें व्यापार विहार क्षेत्र में करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन को सस्ते दामों में बेच दिया गया। भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की नीतिगत भ्रष्टाचार की मिसाल बताया है।
नगर विकास के ठप होने का आरोप
आरोप पत्र के अनुसार, भाजपा शासन में जहां नगर विकास के लिए प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये की राशि आवंटित होती थी, वहीं कांग्रेस सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए। इसके परिणामस्वरूप नगर निगम सीमा का विस्तार होने के बावजूद ग्रामीण वार्डों में बुनियादी सुविधाएं अब भी नदारद हैं। पानी, बिजली और सड़क जैसी आवश्यक सेवाएं नागरिकों को नहीं मिल पा रही हैं, जिससे स्थानीय जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्मार्ट सिटी योजना में अनियमितता
भाजपा ने आरोप लगाया कि बिलासपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के लिए मिली राशि का बंदरबांट किया गया और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ। यही कारण है कि शहर में विकास कार्य या तो अधूरे रह गए या फिर उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस शासन में नगर निगम ने केवल कागजों पर योजनाएं चलाईं, जबकि जमीनी स्तर पर नागरिकों को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला।
जनता के मुद्दों की अनदेखी
पिछले पांच वर्षों में नगर निगम की कार्यशैली को लेकर भाजपा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप पत्र में कहा गया है कि जलभराव, नालियों की सफाई, राशन कार्ड वितरण, पेंशन योजनाएं और मकान निर्माण के नक्शों की मंजूरी जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया। कोनी क्षेत्र में आज भी सीसी रोड का निर्माण अधूरा है, जिससे बारिश के दौरान गलियों में कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी रहती है।
गरीबों पर आर्थिक बोझ
भाजपा ने कांग्रेस सरकार की गरीब विरोधी नीतियों को लेकर भी सवाल उठाए। आरोप पत्र में उल्लेख किया गया कि नगर निगम प्रशासन ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीब मजदूरों को 64,500 रुपये के अन्यायपूर्ण पानी के बिल थमा दिए, जिससे गरीब तबके के लोग आक्रोशित होकर प्रदर्शन करने को मजबूर हो गए। भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की असंवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण बताया।
प्रशासनिक विफलता और न्यायालय का हस्तक्षेप
नगर निगम की स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट को प्रशासनिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करना पड़ा। व्यापार विहार में ढाई एकड़ भूमि पर 2 करोड़ की लागत से बनाए गए ऑक्सीजन जोन की दुर्दशा पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और नगर निगम की लापरवाही को उजागर किया।
इसके अलावा, शहर की सिटी बस सेवा भी अव्यवस्था का शिकार हो गई। कांग्रेस शासन में 12 रूटों पर बसें चलाने का वादा किया गया था, लेकिन 7 रूटों पर ही अनियमित बसें चल रही हैं, जबकि बाकी बसें डिपो में खड़ी-खड़ी खराब हो रही हैं। भाजपा ने इसे नगर निगम की प्रशासनिक अक्षमता का प्रमाण बताया।
वेतन संकट और वित्तीय कुप्रबंधन
भाजपा ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान नगर निगम के अंतर्गत कार्यरत 450 ठेका कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। वहीं, बिजली बिल के रूप में निगम पर 80 करोड़ रुपये का बकाया है। भाजपा ने इसे कांग्रेस सरकार की वित्तीय कुप्रबंधन की पराकाष्ठा करार दिया।
भाजपा का दावा: जनता कांग्रेस शासन से त्रस्त, ऐतिहासिक जीत के लिए तैयार
अमर अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस शासित नगर निगम ने पिछले 5 वर्षों में जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है, और यही कारण है कि इस बार बिलासपुर की जनता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनावों में भाजपा ऐतिहासिक जीत दर्ज करेगी और शहर को सुशासन की राह पर वापस ले जाएगी।
बिलासपुर में भाजपा द्वारा जारी यह आरोप पत्र कांग्रेस सरकार के नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जहां भाजपा ने इन पांच वर्षों को घोटालों और कुप्रबंधन का दौर बताया, वहीं जनता के मन में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई कांग्रेस शासन ने नगर निगम के विकास कार्यों को नजरअंदाज किया? अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आने वाले चुनावों में जनता किसे सत्ता की कुर्सी सौंपती है।


