बिलासपुर। बिरनपुर कांड पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की चार्जशीट ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई हलचल मचा दी है। दो वर्ष पुराने इस मामले में जांच एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट दाखिल करते हुए स्पष्ट किया है कि घटना को जानबूझकर सांप्रदायिक और जातीय रंग देने की कोशिश की गई थी। चार्जशीट के अनुसार, यह प्रयास एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति का हिस्सा था, जिसमें भाजपा के कुछ नेताओं की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
कांग्रेस नेता धनेश्वर साहू पूर्व पिछड़ा आयोग अध्यक्ष ने कांग्रेस भवन में प्रेस वार्ता कर कहा कि सीबीआई की रिपोर्ट में दर्ज है कि बिरनपुर घटना के तुरंत बाद भाजपा नेताओं ने इसे राजनीतिक मुद्दा बनाकर प्रचारित किया। भाजपा ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया था कि प्रशासन ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया। लेकिन जांच एजेंसी का कहना है कि इस मामले में किसी भी तरह का धार्मिक या जातीय टकराव साबित नहीं हुआ।
चार्जशीट में उल्लेख है कि भाजपा के पदाधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंचने से पहले ही आरोप तय कर दिए थे। इसके बाद पार्टी ने मीडिया और जनसभाओं के जरिए इस घटना को “सांप्रदायिक टकराव” के रूप में प्रस्तुत किया।
सीबीआई की जांच रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेताओं ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर भ्रामक तथ्यों का इस्तेमाल किया। इसका उद्देश्य समाज में सांप्रदायिक तनाव फैलाना और चुनावी माहौल को प्रभावित करना था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े कुछ नामों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
चार्जशीट में दर्ज है कि तत्कालीन गृहमंत्री अमित शाह और प्रदेश नेतृत्व ने इस घटना को धार्मिक और जातीय रूप देकर चुनावी लाभ उठाने की कोशिश की थी।
चार्जशीट सामने आते ही कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब जब सीबीआई की जांच ने सच्चाई सामने ला दी है, तो तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष और मौजूदा उपमुख्यमंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस ने मांग की है कि अमित शाह सहित संबंधित नेताओं के खिलाफ कानूनी और नैतिक कार्रवाई की जाए।
आने वाले दिनों में सियासी तूफ़ान?
सीबीआई की चार्जशीट के बाद छत्तीसगढ़ का सियासी माहौल और भी गर्माने की संभावना है। कांग्रेस इस मुद्दे को जनता के बीच लेकर जाने की तैयारी में है, जबकि भाजपा बचाव की मुद्रा में दिख रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस खुलासे का असर राज्य की राजनीति और भाजपा की साख पर किस तरह पड़ता है।


