Tuesday, April 7, 2026
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बर्ड फ्लू का खौफ या रोज़ी पर वार? बिलासपुर में बंद पड़ी 200 से ज्यादा पोल्ट्री दुकानें, सैकड़ों परिवारों की आजीविका संकट में, खोलने की मांग तेज…

बिलासपुर। जिले में एवियन इन्फ्लूएंजा (H5N1) यानी बर्ड फ्लू की आशंका ने पोल्ट्री व्यवसाय को गहरे संकट में डाल दिया है। प्रशासन द्वारा एहतियातन लगाए गए प्रतिबंधों के चलते शहर और आसपास की लगभग 200 से अधिक चिकन दुकानें बंद पड़ी हैं, जिससे इस व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ा है।

दरअसल, 24 मार्च 2026 को कोनी स्थित शासकीय पोल्ट्री फार्म में बर्ड फ्लू वायरस की पुष्टि के बाद प्रशासन ने तत्काल सख्ती बरतते हुए 10 किलोमीटर के दायरे में मुर्गी बिक्री और परिवहन पर रोक लगा दी थी। जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया यह कदम अब लंबा खिंचता जा रहा है, जिससे व्यापारियों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं।

इस मुद्दे को लेकर बिलासपुर पोल्ट्री एसोसिएशन और मुर्गी कटिंग दुकानदार बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर दुकानों को पुनः खोलने की अनुमति मांगी। व्यापारियों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के हर निर्देश का पालन करते हुए अपने प्रतिष्ठान बंद रखे, लेकिन अब आय के सभी स्रोत बंद हो जाने से उनके सामने आर्थिक संकट गहराता जा रहा है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा चुका है और अब तक किसी में संक्रमण के लक्षण नहीं मिले हैं। इसके बावजूद प्रतिबंध जारी रहने से व्यापारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

वहीं, सकरी और काठा कोनी क्षेत्रों में मुर्गियों में बीमारी फैलने की अफवाहों को भी व्यापारियों ने खारिज किया है। उनका कहना है कि ऐसी भ्रामक खबरों से लोगों में डर का माहौल बन रहा है, जिससे पोल्ट्री व्यवसाय को अनावश्यक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

एसोसिएशन ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए शहर के पास स्थित शासकीय पोल्ट्री फार्म को दूर स्थानांतरित किया जाए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो सके।

इस पूरे मामले पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने व्यापारियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उनकी परेशानियों को समझा जा रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली से आई केंद्रीय टीम की रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल, जिले में एक ओर जनस्वास्थ्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है, तो दूसरी ओर सैकड़ों परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा है। ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हुई है, जो यह तय करेगा कि कब तक बंद पड़ी पोल्ट्री दुकानों में फिर से चहल-पहल लौटेगी।

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