बिलासपुर, 7 अप्रैल 2026।
जिले में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। साप्ताहिक टीएल बैठक में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब जिले के सभी निजी स्कूलों को अपने परिसर में मान्यता प्रमाण पत्र अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करना होगा। यह कदम उन अभिभावकों और विद्यार्थियों के हित में उठाया गया है, जो अक्सर स्कूलों की वास्तविक मान्यता को लेकर असमंजस में रहते हैं।
जिला कार्यालय के मंथन सभा कक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने दो टूक कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता या भ्रम की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक निजी स्कूल यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करे कि वह सीबीएसई या छत्तीसगढ़ बोर्ड से मान्यता प्राप्त है या नहीं। इससे फर्जी दावों पर रोक लगेगी और अभिभावकों को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सही निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित करते हुए कहा कि इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए और जिन स्कूलों के पास मान्यता प्रमाण पत्र नहीं है या वे इसे प्रदर्शित नहीं करते, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासन का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही अनियमितताओं पर सीधा प्रहार माना जा रहा है।
बैठक में केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि जनसुविधाओं और विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने साप्ताहिक जनसमस्या निवारण शिविर शुरू करने के निर्देश दिए, ताकि आम जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके। इसके साथ ही जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी विशेष ध्यान देने को कहा गया, ताकि आने वाले समय में जल संकट से निपटा जा सके।
प्रशासन की इस पहल को जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि निजी स्कूल इस आदेश का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं और प्रशासन अपनी सख्ती को जमीनी स्तर पर कितना प्रभावी बना पाता है।


