बिलासपुर। अपराधी चाहे कितने भी शातिर क्यों न हों, तकनीक के सामने उनकी चालाकी ज्यादा देर तक नहीं टिकती। बिलासपुर पुलिस की डिजिटल पहल ‘सशक्त’ (Sashakt) मोबाइल ऐप ने एक बार फिर अपनी उपयोगिता साबित कर दी है। सरकंडा पुलिस ने इसी अत्याधुनिक एप्लीकेशन की मदद से दो वाहन चोरों को गिरफ्तार कर चोरी की पांच दोपहिया गाड़ियां बरामद की हैं। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि अब अपराधियों के लिए पुलिस से बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रहा।
मामला 13 जून 2026 की रात का है, जब मोपका निवासी कमलेश चंद्राकर की एक्टिवा स्कूटी उनके दोस्त के घर के बाहर से चोरी हो गई थी। शिकायत के बाद सरकंडा पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस की जांच और मुखबिर की सूचना के बीच सबसे बड़ा हथियार बना ‘सशक्त’ ऐप, जिसमें संदिग्धों के पास मिली स्कूटी का डेटा चेक करते ही पता चल गया कि वाहन चोरी का है। इसके बाद पुलिस ने बिना देर किए घेराबंदी कर दोनों आरोपियों को धर दबोचा।
गिरफ्तार आरोपियों सुरेंद्र भुनेश्वर (22) और सुजल दर्वे उर्फ रिंकू (24) ने पूछताछ में कई ऐसे खुलासे किए, जिन्होंने पुलिस को भी चौंका दिया। आरोपियों ने कबूल किया कि वे वर्ष 2025 और 2026 के दौरान अलग-अलग इलाकों से लगातार दोपहिया वाहन चोरी करते रहे और उन्हें बेहद कम कीमत पर बेच देते थे।
आरोपियों ने जुलाई 2025 में ब्राउन एक्टिवा, अक्टूबर 2025 में स्प्लेंडर, फरवरी 2026 में ग्रे एक्टिवा और जून 2026 में यामाहा मोटरसाइकिल चोरी करने की बात स्वीकार की। पुलिस ने इन सभी वाहनों को बरामद कर लिया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी चोरी की गाड़ियों को महज दो हजार से दस हजार रुपये तक में बेच देते थे। इन पैसों से वे ऐश-आराम और अपने शौक पूरे करते थे। पुलिस अब उन लोगों की भी तलाश कर रही है जिन्होंने बिना दस्तावेजों के चोरी के वाहन खरीदे।
‘सशक्त’ ऐप बना पुलिस की नई ताकत
इस पूरे ऑपरेशन में बिलासपुर पुलिस के ‘सशक्त’ मोबाइल ऐप की भूमिका सबसे अहम रही। यह एप्लीकेशन लावारिस और संदिग्ध वाहनों का डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत उपलब्ध कराती है। साथ ही आम नागरिक भी इस ऐप के जरिए गोपनीय सूचनाएं साझा कर सकते हैं, जिन पर पुलिस तत्काल कार्रवाई कर रही है। डिजिटल तकनीक और पुलिसिंग का यह मेल अपराध नियंत्रण में प्रभावी साबित हो रहा है।
अब खरीदार भी नहीं बचेंगे
बिलासपुर पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि केवल चोरी करने वाला ही नहीं, बल्कि चोरी का माल खरीदने वाला भी कानून की नजर में बराबर का अपराधी है। बिना कागजात के सस्ते दामों में वाहन खरीदने वालों के खिलाफ अब ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाई जाएगी। ऐसे लोगों पर भी कठोर कानूनी कार्रवाई कर सीधे जेल भेजा जाएगा।
संदेश साफ है…
बिलासपुर पुलिस की यह कार्रवाई केवल दो वाहन चोरों की गिरफ्तारी भर नहीं है, बल्कि यह संकेत भी है कि अपराध के खिलाफ अब तकनीक सबसे बड़ा हथियार बन चुकी है। ‘सशक्त’ ऐप के जरिए पुलिस अपराधियों तक तेजी से पहुंच रही है और अब चोरी के नेटवर्क के साथ-साथ उनके खरीदार भी कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएंगे। अपराधियों के लिए यह साफ चेतावनी है—डिजिटल निगरानी के इस दौर में चोरी का हर पहिया आखिरकार पुलिस तक पहुंच ही जाएगा।


