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जल निकासी दावों की खुली पोल, कई कॉलोनियां जलमग्न, SDRF को उतारनी पड़ी नाव, कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए अलर्ट पर रहने के निर्देश…

बिलासपुर। मानसून की पहली ही मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर शहर की चमकदार विकास योजनाओं और जल निकासी व्यवस्था की असलियत सबके सामने ला दी। कुछ घंटों की बारिश ने पूरे शहर को पानी-पानी कर दिया। सड़कें तालाब बन गईं, नाले उफान पर आ गए, घरों में पानी घुस गया और हालात इतने बिगड़े कि लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए SDRF की टीम को नाव लेकर उतरना पड़ा। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर हर साल करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बिलासपुर पहली बारिश में ही क्यों डूब जाता है?

गुरुवार रात हुई तेज बारिश के बाद श्रीकांत वर्मा मार्ग, हंसा विहार, मित्र विहार, सरकंडा का बंधवापारा, जोरापारा, शिवम होम्स, तालापारा, मंगला और कई अन्य कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। कई जगह सड़क और नाले का फर्क ही खत्म हो गया। लोगों के घरों में पानी घुसा, घरेलू सामान खराब हुआ और पूरी रात लोग पानी निकालने में जुटे रहे।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कलेक्टर बंगले तक में पानी भर गया। जब प्रशासनिक व्यवस्था का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला परिसर ही जलभराव से नहीं बच सका, तो आम नागरिकों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

बारिश ने बिजली व्यवस्था भी चरमरा दी। कई ट्रांसफॉर्मर पानी में डूब गए, जिससे शहर के कई हिस्सों की बिजली गुल हो गई। बिजली बंद होने के कारण पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई और नागरिकों को दोहरी परेशानी झेलनी पड़ी।

सबसे ज्यादा चिंता सरकंडा के बंधवापारा क्षेत्र में देखने को मिली, जहां जलभराव के बीच कई परिवार फंस गए। हालात इतने बिगड़े कि SDRF को दो नावों के साथ रेस्क्यू अभियान चलाना पड़ा। यह दृश्य किसी बाढ़ग्रस्त जिले का नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी बनने का दावा करने वाले बिलासपुर का था।

सबसे बड़ा सवाल नगर निगम की तैयारियों पर खड़ा हो गया है। कुछ ही दिन पहले निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे ने शहर के जलभराव संभावित इलाकों का निरीक्षण कर दावा किया था कि नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त है और इस बार शहर में बड़े स्तर पर जलभराव नहीं होगा। लेकिन पहली ही तेज बारिश ने इन दावों की पूरी तरह पोल खोल दी। जिन इलाकों को सुरक्षित बताया गया था, वहीं सबसे ज्यादा पानी भर गया।

बारिश के बाद अब प्रशासन पूरी तरह राहत और बचाव मोड में आ गया है। लगातार हो रही बारिश और नदी-नालों के उफान को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सभी राजस्व, नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों को फील्ड में रहने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित क्षेत्रों का तत्काल सर्वे कर राहत कार्य शुरू करने, कच्चे मकानों के क्षतिग्रस्त होने पर आरबीसी 6(4) के तहत प्रकरण तैयार कर सहायता देने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के निर्देश जारी किए गए हैं।

मौसम विभाग ने भी शुक्रवार को बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश, तेज हवा और बिजली गिरने की संभावना जताई है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों, रपटों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लेने की अपील की है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हर मानसून में बिलासपुर की यही तस्वीर दोहराई जाएगी? करोड़ों रुपये की ड्रेनेज योजनाएं, नालों की सफाई के दावे और स्मार्ट सिटी के विकास मॉडल आखिर पहली ही बारिश में क्यों बह जाते हैं? जब तक जल निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं बनती और जिम्मेदारी तय नहीं होती, तब तक हर मानसून शहरवासियों के लिए राहत नहीं, बल्कि आफत बनकर ही आता रहेगा।

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