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नाले पर कब्जा, खेत बना तालाब! किसानों का आरोप— कॉलोनाइजर की मनमानी ने डुबो दी सैकड़ों एकड़ फसल…

बिलासपुर, 21 जुलाई 2026। मानसून की बारिश जहां किसानों के लिए खुशहाली का संदेश लेकर आती है, वहीं बिलासपुर के ग्राम सेंदरी में यही बारिश किसानों के लिए तबाही बन गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह केवल अतिवृष्टि का मामला नहीं, बल्कि प्राकृतिक नाले से छेड़छाड़ का नतीजा है। किसानों का कहना है कि एक कॉलोनाइजर ने प्राकृतिक जल निकासी मार्ग को पाटकर उसकी चौड़ाई कम कर दी, जिससे बारिश का पानी खेतों में भर गया और सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो गई।

सोमवार को ग्राम सेंदरी के किसानों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए पूरे मामले की जांच कराने, नाले से अतिक्रमण हटाने और संबंधित कॉलोनाइजर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। किसानों का कहना है कि अगर समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो हर मानसून में यही हालात बनेंगे और खेती करना मुश्किल हो जाएगा।

किसानों के अनुसार तालानार खार क्षेत्र का प्राकृतिक नाला बरपाली, समतला, मोपका बायपास, मालाबंद सहित आसपास के चार से पांच गांवों का वर्षा जल अरपा नदी तक पहुंचाता है। लेकिन करवा बाबा मंदिर के पास स्थित पुल के समीप लगभग 20 से 25 फीट चौड़े इस प्राकृतिक नाले को पाटकर केवल 3 से 4 फीट की अंडरग्राउंड पाइपलाइन डाल दी गई। ग्रामीणों का आरोप है कि इतनी संकरी पाइप भारी बारिश का पानी निकालने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई, जिसके कारण खेतों में जलभराव हो गया और धान की फसल डूबकर खराब हो गई।

ग्रामीणों का कहना है कि खेती उनकी आजीविका का एकमात्र साधन है। बीज, खाद, मजदूरी और अन्य कृषि कार्यों में हजारों रुपये खर्च करने के बाद जब फसल तैयार होने की उम्मीद थी, तब जलभराव ने पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया। कई किसानों के खेत अब तालाब का रूप ले चुके हैं और आर्थिक संकट उनके सामने खड़ा हो गया है।

यह मामला केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि अनियोजित कॉलोनियों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों पर बढ़ते अतिक्रमण की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। यदि विकास के नाम पर नालों को पाटने और उनकी चौड़ाई कम करने की अनुमति मिलती रही तो हर वर्ष बारिश के दौरान खेतों और रिहायशी इलाकों में जलभराव जैसी समस्याएं बढ़ती जाएंगी।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्राकृतिक नाले को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जाए, अतिक्रमण तत्काल हटाया जाए, पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, फसल नुकसान का सर्वे कर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए तथा यदि जांच में कॉलोनाइजर की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर होगी। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसानों की इस पुकार को सुनकर प्राकृतिक जल निकासी व्यवस्था को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएगा, या फिर किसानों की मेहनत हर साल इसी तरह पानी में डूबती रहेगी?

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