Homeक्राइमकिसानों की फसल बीमा राशि पर रिश्वतखोरी: ACB का बड़ा शिकंजा! दो...

किसानों की फसल बीमा राशि पर रिश्वतखोरी: ACB का बड़ा शिकंजा! दो कृषि विस्तार अधिकारी 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथों पकड़े गए…

कांकेर में ACB की कार्रवाई से कृषि विभाग में मचा हड़कंप, सरकारी योजना का लाभ दिलाने के बदले पैसे मांगने का आरोप

कांकेर। किसानों को उनकी फसल का उचित मुआवजा और बीमा राशि दिलाने के लिए सरकार योजनाएं चलाती है, लेकिन जब इसी सरकारी व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों पर किसानों से रिश्वत मांगने का आरोप लगे, तो व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े होना लाजिमी है। छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के आमाबेड़ा तहसील क्षेत्र में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई ने ऐसा ही मामला सामने ला दिया है। यहां किसानों को फसल बीमा की राशि दिलाने के एवज में कथित तौर पर रिश्वत मांगने के आरोप में दो ग्रामीण कृषि विकास विस्तार अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है।

आरोपियों की पहचान प्रवीण चंद्राकर और सुंदर बछड़ के रूप में बताई गई है। कार्रवाई के बाद कृषि विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, मामले में विस्तृत आधिकारिक जानकारी और आगे की कानूनी कार्रवाई का विवरण सामने आना अभी बाकी है।

मिली जानकारी के अनुसार, आमाबेड़ा तहसील के आलानार पंचायत निवासी किसान सुनील कोमरा और सगाऊ कोमरा से फसल बीमा की राशि दिलाने के एवज में कथित तौर पर पैसों की मांग की गई थी। किसानों का आरोप था कि बीमा राशि का लाभ दिलाने के लिए उनसे रिश्वत मांगी जा रही है। इसके बाद किसानों ने एंटी करप्शन ब्यूरो तक अपनी शिकायत पहुंचाई।

शिकायत मिलने के बाद ACB ने मामले की जांच की और कथित रिश्वतखोरी को पकड़ने के लिए कार्रवाई की योजना तैयार की। इसके बाद किसानों को निर्धारित रकम के साथ पहुंचने की रणनीति बनाई गई, ताकि शिकायत की पुष्टि होने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

जानकारी के मुताबिक, ACB की योजना के तहत बुधवार को किसान 10 हजार रुपये लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान टीम ने कार्रवाई करते हुए दोनों कृषि अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत लेते पकड़ लिया। इस कार्रवाई के बाद सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि दोनों अधिकारियों से अलग-अलग कितनी रकम बरामद हुई, रिश्वत की राशि किसके पास से मिली और कार्रवाई के दौरान कौन-कौन से अन्य साक्ष्य जब्त किए गए। इन तथ्यों की पुष्टि विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही हो सकेगी।

फसल बीमा किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण सहारा है। प्राकृतिक आपदा, फसल खराब होने या अन्य पात्र परिस्थितियों में बीमा योजना से मिलने वाली राशि किसानों को आर्थिक संकट से उबरने में मदद करती है। ऐसे में यदि बीमा राशि दिलाने की प्रक्रिया में रिश्वत की मांग किए जाने का आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल भ्रष्टाचार का मामला नहीं, बल्कि किसानों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था पर भरोसे से जुड़ा गंभीर प्रश्न भी है।

किसानों को योजनाओं का लाभ निर्धारित नियमों के अनुसार मिलना चाहिए। किसी भी पात्र किसान को उसके वैधानिक लाभ के लिए कथित तौर पर रिश्वत देने के लिए मजबूर किए जाने की स्थिति सरकारी तंत्र की जवाबदेही पर सवाल खड़े करती है।

कांकेर के आमाबेड़ा क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई के बाद अब मामले की विस्तृत जांच, बरामदगी और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध की जाने वाली कानूनी कार्रवाई को लेकर नजरें टिकी हैं। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि जांच में रिश्वत की कथित मांग से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की पड़ताल किस तरह की जाती है।

फिलहाल, आरोपियों के विरुद्ध लगे आरोपों को जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही अंतिम रूप से तय किया जाएगा। ACB की कार्रवाई ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी योजनाओं के लाभ के बदले कथित अवैध वसूली की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना आवश्यक है। किसानों को उनका हक दिलाने वाली व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना ही ऐसी कार्रवाइयों का वास्तविक उद्देश्य होना चाहिए।

spot_img

advertisement

spot_img
RELATED ARTICLES

Recent posts