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साइबर ठगी के पैसों का ठिकाना बना बैंक खाता! म्यूल अकाउंट के जरिए संदिग्ध लेनदेन का खुलासा, पुलिस और ACCU ने खाताधारक को दबोचा…

बिलासपुर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच अब ठगों के साथ-साथ उनके लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने वालों पर भी पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में बिलासपुर की तारबाहर पुलिस और ACCU की संयुक्त कार्रवाई में कथित म्यूल बैंक खाते के धारक को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, संबंधित बैंक खाते के खिलाफ साइबर धोखाधड़ी से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जांच में खाते में धोखाधड़ी की रकम के साथ अन्य राशि जमा होने और UPI व ATM के माध्यम से निकासी किए जाने की जानकारी सामने आई है।

पुलिस ने आरोपी की पहचान विश्वजीत बाली (33 वर्ष), पिता विनय कुमार, निवासी हेमू नगर, तहसीलदार गली, थाना तोरवा, बिलासपुर के रूप में की है। मामले में अपराध क्रमांक 360/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 61(2), 317(5), 318(4), 323 और 317(4) के अंतर्गत अपराध दर्ज कर विवेचना की जा रही है।

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस मुख्यालय रायपुर से लेयर-1 म्यूल खातों की पहचान कर जांच एवं कार्रवाई करने के निर्देश मिले थे। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्थानीय स्तर पर संदिग्ध बैंक खातों की पड़ताल कर प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी अभियान के तहत भारत सरकार के पोर्टल के माध्यम से एक्सिस बैंक के एक संदिग्ध खाते की जानकारी सामने आई, जिसके खिलाफ अलग-अलग शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

संदिग्ध खाते की पहचान संख्या 924020055482571 के रूप में की गई। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। बैंक स्टेटमेंट की पड़ताल के दौरान खाते में धोखाधड़ी से संबंधित रकम के अलावा अन्य राशि जमा होने तथा UPI और ATM के माध्यम से रकम निकाले जाने की जानकारी सामने आई।

साइबर अपराधों में म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल अक्सर ठगी से प्राप्त रकम को एक खाते से दूसरे खाते में स्थानांतरित करने या नकदी निकालने के लिए किया जाता है। ऐसे खातों के जरिए असली साइबर ठग अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं, जबकि खाताधारक की भूमिका और लेनदेन की प्रकृति जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन जाती है।

इस मामले में भी संदिग्ध खाते में हुए लेनदेन की जांच के बाद पुलिस ने खाताधारक विश्वजीत बाली को गिरफ्तार किया है। हालांकि, उपलब्ध पुलिस जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि खाते के जरिए कुल कितनी रकम का संदिग्ध लेनदेन हुआ, कितने लोगों से ठगी की गई या आरोपी को खाता उपलब्ध कराने के बदले कोई रकम मिली थी या नहीं। इन बिंदुओं पर विवेचना के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं।

साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों पर कार्रवाई के तहत तारबाहर पुलिस और ACCU बिलासपुर ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसे न्यायालय में पेश किया है। मामले में बैंक खाते के लेनदेन, शिकायतों और आरोपी की भूमिका से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

साइबर अपराधों में बैंक खाते की भूमिका बेहद अहम होती है। कई बार खाताधारक अपने खाते का इस्तेमाल दूसरों को करने देते हैं या कमीशन के लालच में बैंकिंग विवरण साझा कर देते हैं। ऐसे मामलों में खाते से जुड़े लेनदेन और संबंधित व्यक्ति की वास्तविक भूमिका की जांच की जाती है। यदि अपराध में संलिप्तता प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

बिलासपुर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर ठगी के उन वित्तीय रास्तों की जांच का हिस्सा है, जिनके जरिए धोखाधड़ी की रकम का लेनदेन किया जाता है। अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्ध खाते में कितनी रकम आई, उसका वास्तविक लाभार्थी कौन था और आरोपी की भूमिका किस स्तर तक थी।

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