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ज्ञापनों से नहीं मानी सरकार तो सड़कों पर उतरे कर्मचारी-पेंशनर, बिलासपुर में गूंजा आक्रोश; लंबित मांगों पर आर-पार की चेतावनी…

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में कर्मचारियों और पेंशनरों का असंतोष अब ज्ञापनों और पत्राचार की सीमा पार कर सड़कों तक पहुंच गया है। लंबित मांगों पर सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ बुधवार 30 सितंबर को संभागीय मुख्यालयों में छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन और छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने धरना-प्रदर्शन और रैली निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की। बिलासपुर में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय की मांग की।

पेंशनर्स एसोसिएशन का कहना है कि राज्य के करीब 1 लाख 25 हजार पेंशनरों और उनके परिवारों के सामने स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़ा संकट है। उम्र के इस पड़ाव में गंभीर बीमारियों के इलाज पर लाखों रुपये खर्च करना हर परिवार के लिए संभव नहीं है। संगठन ने कहा कि केवल मेडिकल रीइम्बर्समेंट की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। राजस्थान की RGHS और तमिलनाडु की New Health Insurance Scheme का उदाहरण देते हुए पेंशनरों ने छत्तीसगढ़ में भी सरकारी और सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा लागू करने की मांग की है।

पेंशनरों ने जनवरी 2026 से लंबित 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का एरियर सहित भुगतान करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही 70 वर्ष की आयु पर 10 प्रतिशत, 75 वर्ष पर 15 प्रतिशत और 80 वर्ष पर 20 प्रतिशत पेंशन वृद्धि की मांग भी रखी गई है। संगठन ने पेंशनर्स कल्याण परिषद के पुनर्गठन और प्रत्येक तीन महीने में शासन स्तर पर बैठक आयोजित करने की मांग की है। मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना में पेंशनरों को शामिल करने के साथ उच्च न्यायालय के निर्णय के अनुरूप 86 माह के लंबित महंगाई भत्ते के एरियर्स के भुगतान की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

दूसरी ओर तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी लंबित मांगों को प्रमुखता से उठाया। संघ ने केंद्रीय कर्मचारियों की तर्ज पर 1 जनवरी 2026 से देय 2 प्रतिशत महंगाई भत्ते और महंगाई राहत का एरियर सहित भुगतान जीपीएफ खाते में करने की मांग की है। सेवानिवृत्ति के समय अवकाश नकदीकरण की सीमा 240 दिन से बढ़ाकर 300 दिन करने की मांग भी रखी गई है।

शिक्षक एलबी संवर्ग के कर्मचारियों के लिए प्रथम नियुक्ति तिथि से सेवा की गणना कर सभी सेवा लाभ देने और टीईटी के स्थान पर सीमित विभागीय परीक्षा का प्रावधान करने की मांग उठाई गई है। वहीं अनुकंपा नियुक्ति में लागू 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त कर सभी पात्र मामलों में नियुक्ति देने की मांग भी की गई है।

संघ ने संविदा, दैनिक वेतनभोगी और अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण का मुद्दा भी उठाया। इसके अलावा ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजकों के पदनाम में परिवर्तन, आईटीआई कर्मचारियों को समयमान और पदोन्नति, छात्रावास अधीक्षकों की पदोन्नति तथा लघु वनोपज संघ के कर्मचारियों के संविलियन जैसी मांगें भी सरकार के सामने रखी गई हैं।

कर्मचारी और पेंशनर संगठनों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बुधवार का प्रदर्शन इसी बढ़ते असंतोष का संकेत है। अब निगाहें सरकार पर हैं कि वह वर्षों से लंबित बताए जा रहे इन मुद्दों पर सिर्फ आश्वासन देती है या फिर कोई ठोस निर्णय लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों को राहत भी देती है।

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