
छत्तीसगढ़ में जनगणना का मैदानी कार्य 25 जनवरी से 28 फरवरी 2027 तक चलेगा। इस दौरान प्रगणक घर-घर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। यह केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकारी योजनाओं, विकास कार्यों और नीतिगत फैसलों का आधार तैयार करने वाला महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति की गणना और आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी।
जनगणना के दूसरे चरण में प्रदेशभर में लगभग 66 हजार प्रगणक एवं पर्यवेक्षक मैदानी स्तर पर जिम्मेदारी संभालेंगे। इनके प्रशिक्षण के लिए जिलों ने 1,120 फील्ड ट्रेनर्स नामित किए हैं। वहीं, फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित करने के लिए कुल 60 मास्टर ट्रेनर्स की टीम बनाई गई है। इनमें 47 मास्टर ट्रेनर्स जिलों से और 13 जनगणना कार्य निदेशालय से नामित किए गए हैं।
नवा रायपुर अटल नगर स्थित प्रशासन अकादमी में आयोजित राज्यस्तरीय प्रशिक्षण के प्रथम बैच का आयोजन 2 नवंबर से 5 नवंबर तक किया गया। इसमें 16 जिलों के मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए। छत्तीसगढ़ के लिए नामित राष्ट्रीय प्रशिक्षक अशोक मिश्र और प्रदीप कुमार साव, दोनों संयुक्त निदेशक, ने प्रशिक्षण प्रदान किया।
प्रशिक्षण के दौरान जनगणना के दूसरे चरण की प्रक्रिया, प्रश्नावली की बारीकियां, प्रगणना की तकनीकी जानकारी, मोबाइल एप्लीकेशन का इस्तेमाल, आंकड़ों का संकलन और उनकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। व्यावहारिक प्रशिक्षण के जरिए मास्टर ट्रेनर्स को इस तरह तैयार किया गया कि वे आगे जिला स्तर पर फील्ड ट्रेनर्स को प्रभावी प्रशिक्षण दे सकें।
प्रथम बैच में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, सरगुजा, जशपुर, रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, बलौदाबाजार-भाटापारा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के मास्टर ट्रेनर्स शामिल हुए।
प्रशिक्षण का दूसरा बैच 16 से 19 नवंबर 2026 तक प्रशासन अकादमी, नवा रायपुर में आयोजित होगा। इसमें शेष जिलों के मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके बाद मास्टर ट्रेनर्स जिला स्तर पर फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षण देंगे और फिर फील्ड ट्रेनर्स हजारों प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को मैदानी कार्य के लिए तैयार करेंगे। इस बहुस्तरीय व्यवस्था के जरिए प्रदेशभर में जनगणना कार्य की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली के निर्देशों के अनुरूप छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव के मार्गदर्शन में यह पूरी प्रक्रिया संचालित हो रही है। गृह विभाग की राज्य नोडल अधिकारी एवं प्रमुख सचिव निहारिका बारीक तथा जनगणना कार्य निदेशालय के निदेशक कार्तिकेया गोयल के दिशा-निर्देशों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
जनगणना का दूसरा चरण प्रशासनिक मशीनरी की वास्तविक परीक्षा साबित होगा। प्रदेश के प्रत्येक घर तक पहुंचना, किसी भी व्यक्ति की गणना छूटने नहीं देना, सही जानकारी दर्ज करना और तकनीकी गलतियों से बचना सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी। आंकड़ों में छोटी सी चूक भी भविष्य की योजनाओं और नीतिगत फैसलों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में प्रशिक्षण की गुणवत्ता और मैदानी अमले की जवाबदेही इस पूरे अभियान की सफलता तय करेगी।
अब 25 जनवरी 2027 से छत्तीसगढ़ में जनगणना का बड़ा अभियान शुरू होगा। प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ 66 हजार कर्मचारियों को मैदान में उतारने की नहीं, बल्कि प्रदेश के हर व्यक्ति को जनगणना के दायरे में लाने की होगी।

