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वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान को लेकर बिलासपुर में कांग्रेस का बड़ा मंथन, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवालों के बीच मतदाता अधिकारों की लड़ाई तेज करने की तैयारी…

बिलासपुर। लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का वोट है, लेकिन जब इसी वोट की निष्पक्षता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगें, तो मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही और आम नागरिक के अधिकारों से जुड़ जाता है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने ‘वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान’ के जरिए चुनावी पारदर्शिता और मताधिकार की सुरक्षा का सवाल तेज कर दिया है। बिलासपुर कांग्रेस भवन में आयोजित बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अभियान को लेकर चर्चा की और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को जनस्तर तक पहुंचाने पर जोर दिया।

बैठक में एआईसीसी पर्यवेक्षक नवज्योति पटनायक, प्रदेश कांग्रेस सह-प्रभारी विजय जांगिड़, शहर प्रभारी शैलेश नितिन त्रिवेदी, ग्रामीण प्रभारी सीमा वर्मा, शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, विधायक अटल श्रीवास्तव, विधायक दिलीप लहरिया, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय सहित जिले के वरिष्ठ कांग्रेसजन और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

बैठक का मुख्य केंद्र मतदाता सूची के पुनरीक्षण, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे रहे। कांग्रेस का कहना है कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का समान अवसर मिलना चाहिए और किसी भी मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटने या अपात्र नाम शामिल होने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

कांग्रेस का आरोप है कि देश के विभिन्न चुनावों में मतदाता सूचियों और चुनावी आंकड़ों को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। पार्टी इन सवालों की निष्पक्ष जांच और संबंधित संस्थाओं से स्पष्ट जवाब की मांग कर रही है। उसका तर्क है कि चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रखने के लिए केवल स्पष्टीकरण पर्याप्त नहीं, बल्कि पारदर्शी और सत्यापन योग्य व्यवस्था भी जरूरी है।

महाराष्ट्र से महादेवपुरा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी ने पूर्व में महाराष्ट्र, कर्नाटक के महादेवपुरा, आलंद और हरियाणा से जुड़े मामलों में मतदाता सूची तथा चुनावी आंकड़ों को लेकर कथित विसंगतियों के मुद्दे उठाए हैं। पार्टी ने महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाताओं की संख्या में वृद्धि तथा महादेवपुरा में कथित दोहरे पंजीकरण और संदिग्ध प्रविष्टियों का हवाला देते हुए जांच की मांग की है।

कांग्रेस का कहना है कि जब मतदाता सूची और चुनावी आंकड़ों को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं, तो उनका जवाब तथ्यों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर सामने आना चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण निष्पक्ष जांच और प्रमाणित आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकता है।

SIR प्रक्रिया पर सवाल

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठा रही है। पार्टी की चिंता है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने के दौरान यदि पर्याप्त पारदर्शिता, सही सत्यापन और प्रभावी शिकायत निवारण की व्यवस्था नहीं रही, तो पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

कांग्रेस की मांग है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हो और प्रत्येक प्रभावित नागरिक को अपनी पात्रता साबित करने का पर्याप्त अवसर मिले। नामों के सत्यापन में किसी तरह की तकनीकी या दस्तावेजी त्रुटि सामने आने पर उसे समय रहते सुधारा जाए।

मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार का व्यावहारिक आधार है। ऐसे में किसी पात्र नागरिक का नाम गलत तरीके से हटना केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक अधिकार के इस्तेमाल में बाधा बन सकता है। यही वजह है कि इस प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग लगातार उठ रही है।

निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता

कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को लेकर भी सवाल उठाए हैं। वर्ष 2023 के कानून के तहत चयन समिति की संरचना में भारत के मुख्य न्यायाधीश की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री को शामिल किया गया है। विपक्ष का तर्क है कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए नियुक्ति प्रक्रिया में व्यापक विश्वास होना जरूरी है।

कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती से सीधे जुड़ी हुई है। चुनाव में भाग लेने वाले सभी राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं को यह भरोसा होना चाहिए कि नियमों का पालन निष्पक्ष तरीके से किया जा रहा है और शिकायतों का निपटारा बिना किसी पक्षपात के होगा।

राजनीतिक बयानबाजी

‘वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान’ के जरिए कांग्रेस चुनावी पारदर्शिता के मुद्दे को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ना चाहती है। पार्टी की रणनीति मतदाता सूची के सत्यापन, नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और कथित अनियमितताओं से संबंधित शिकायतों को उचित मंच तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

लेकिन इस अभियान की असली परीक्षा केवल बैठकों, नारों और राजनीतिक बयानों से नहीं होगी। महत्वपूर्ण यह होगा कि पार्टी मतदाता सूची से जुड़ी शिकायतों के समर्थन में कितने ठोस दस्तावेज सामने लाती है, प्रभावित मतदाताओं की मदद के लिए क्या कदम उठाती है और संबंधित संस्थाओं से जवाबदेही तय कराने में कितनी प्रभावी भूमिका निभाती है।

बिलासपुर कांग्रेस भवन की बैठक

बिलासपुर कांग्रेस भवन में एआईसीसी पर्यवेक्षक, प्रदेश सह-प्रभारी, शहर एवं ग्रामीण प्रभारियों और जिले के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने अभियान को लेकर संगठनात्मक सक्रियता का संकेत दिया। शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री सहित पार्टी के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं की भागीदारी से इस मुद्दे को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी दिखाई दी।

कांग्रेस के सामने चुनौती है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर उठाए जा रहे सवालों को बिलासपुर के आम मतदाताओं से जोड़े और अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाए। इसके लिए बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच, नामों में त्रुटियों को सुधारने में सहयोग और शिकायतों के निराकरण की निगरानी जैसे कदम अहम साबित हो सकते हैं।

सवाल किसी एक पार्टी का नहीं

लोकतंत्र में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता ऐसे मुद्दे हैं, जिनका महत्व किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं है। चुनावी व्यवस्था पर जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आरोपों की जांच तथ्यों के आधार पर हो, शिकायतों का समयबद्ध निराकरण किया जाए और संस्थागत जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।

बिलासपुर में ‘वोट बचाओ–देश बचाओ अभियान’ को लेकर हुई बैठक ने एक बार फिर मतदाता अधिकारों और चुनावी पारदर्शिता की बहस को सामने ला दिया है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस अभियान को किस तरह जनआंदोलन का रूप देती है और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या जवाब सामने आता है।

लोकतंत्र की असली ताकत केवल चुनाव कराने में नहीं, बल्कि हर पात्र नागरिक के वोट को सुरक्षित रखने, उसे बिना किसी बाधा के मतदान का अवसर देने और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा कायम रखने में है।

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