बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में बलौदाबाजार हिंसा मामले में भिलाई के विधायक देवेंद्र यादव की जमानत अर्जी पर बुधवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई पूरी हो गई। जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित रखा है।
देवेंद्र यादव पर आरोप है कि उन्होंने भीड़ को उकसाने का काम किया, जिसके चलते बलौदाबाजार क्षेत्र में हिंसा भड़क गई थी। इस घटना ने क्षेत्र में अशांति और सामाजिक तनाव को बढ़ा दिया था। पुलिस ने इस मामले में विधायक के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
बलौदाबाजार में यह हिंसा तब हुई जब कुछ स्थानीय विवादों ने अचानक बड़ा रूप ले लिया। प्रशासन का दावा है कि विधायक देवेंद्र यादव ने कथित तौर पर भीड़ को उकसाने में भूमिका निभाई। इसके परिणामस्वरूप सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा और शांति-व्यवस्था भंग हुई।
देवेंद्र यादव ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीति से प्रेरित बताया है। उनके वकीलों का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों के पीछे कोई ठोस सबूत नहीं है और यह मामला केवल राजनीतिक साजिश का हिस्सा है।
यादव के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल का इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं है और उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया जा रहा है। दूसरी ओर, सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि यादव की भूमिका जांच के दौरान सामने आई है और उन्हें जमानत देने से मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुरक्षित रखा है। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसले पर हैं, जो इस मामले में विधायक की कानूनी स्थिति को निर्धारित करेगा।
इस मामले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है। विपक्ष ने इस घटना को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। वहीं, समर्थकों का दावा है कि यह एक जननेता को बदनाम करने की साजिश है।
हाईकोर्ट के फैसले का इंतजार सभी पक्ष कर रहे हैं, क्योंकि यह निर्णय न केवल इस मामले के लिए बल्कि राज्य की राजनीतिक स्थिति के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।


