बिलासपुर। लोफंदी गांव में जहरीली शराब से नौ लोगों की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं के बीच तीखी बहस छिड़ी हुई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया, लेकिन गृहमंत्री विजय शर्मा ने इसे जहरीली शराब से हुई मौत मानने के बजाय स्वाभाविक मृत्यु करार दिया। सरकार के इस बयान के बाद कांग्रेस और अधिक आक्रामक हो गई है।
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय केशरवानी ने इस बयान पर सवाल खड़े करते हुए बेलतरा के विधायक सुशांत शुक्ला के बयान का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि लोफंदी में मौतें जहरीली शराब से हुई हैं। विजय केशरवानी ने विधायक सुशांत शुक्ला को धन्यवाद देते हुए कहा कि “देर से ही सही, लेकिन उन्होंने सच्चाई को स्वीकार किया।”
कांग्रेस लगातार इस मामले में न्यायिक जांच की मांग कर रही है। विजय केशरवानी ने विधायक सुशांत शुक्ला से पूछा, “आपकी सरकार है, आप स्थानीय विधायक हैं, फिर भी 20 दिन बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों को मुआवजा क्यों नहीं मिला?” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी दल का विधायक खुद मान रहा है कि मौतें जहरीली शराब से हुई हैं, तो फिर सरकार इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख क्यों नहीं अपना रही है?
गृहमंत्री विजय शर्मा के जवाब के बाद सरकार पर सवालों की बौछार हो गई है। यदि सरकार मौतों को स्वाभाविक मान रही है, तो फिर विधायक सुशांत शुक्ला के बयान का क्या मतलब है? क्या सरकार खुद ही इस मामले में असमंजस में है?
कांग्रेस ने साफ कहा है कि यदि यह मामला गंभीर है और विधायक खुद मान रहे हैं कि मौतें जहरीली शराब से हुई हैं, तो दोषियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को शीघ्र मुआवजा दिया जाना चाहिए।
लोफंदी के लोग न्याय की उम्मीद कर रहे हैं। गरीब परिवार जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया, वे न्याय की राह देख रहे हैं। विपक्ष और जनता दोनों की मांग है कि सरकार स्पष्ट करे कि इस त्रासदी का असली कारण क्या था और कब तक दोषियों पर कार्रवाई होगी।


