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20 साल की सेवा: छत्तीसगढ़ के तकनीकी सहायकों का सरकार को अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानीं तो रायपुर में गूंजेगा आंदोलन का बिगुल…

मनरेगा से वीबी-जी राम जी योजना तक दो दशक से काम कर रहे कर्मचारियों में आक्रोश, नियमितीकरण से लेकर वेतन वृद्धि तक की मांग; 13-14 अक्टूबर को जिला स्तर पर हड़ताल और 15 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में विशाल रैली की तैयारी

बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले तकनीकी सहायक कर्मचारी आज खुद अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं। विडंबना देखिए कि जिस तकनीकी अमले की मेहनत और कार्यशैली के बूते प्रदेश को 12 राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने का दावा किया जा रहा है, उसी अमले को करीब 20 वर्षों की सेवा के बाद भी नियमितीकरण, स्थायी रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का इंतजार है। वर्षों से काम करने के बावजूद भविष्य की अनिश्चितता और समय पर वेतन नहीं मिलने की समस्या ने कर्मचारियों के बीच असंतोष बढ़ा दिया है।

छत्तीसगढ़ तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ (पंजीयन क्रमांक-122201977382) ने अब अपनी मांगों को लेकर सरकार के सामने निर्णायक लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संघ के प्रांताध्यक्ष अशोक कुमार कुर्रे और प्रांतीय महासचिव प्रशांत सिंह कुर्रे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री विजय शर्मा को ज्ञापन भेजकर लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की है। संघ ने साफ चेतावनी दी है कि यदि शासन ने उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक तथा उग्र किया जाएगा।

संघ का कहना है कि विकसित भारत-जी राम जी योजना (वीबी-जी राम जी), जो पहले मनरेगा के नाम से संचालित थी, के अंतर्गत तकनीकी सहायक पिछले लगभग 20 वर्षों से लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों के तकनीकी क्रियान्वयन और योजनाओं की प्रगति में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके बावजूद कर्मचारियों को आज तक ऐसी सेवा सुरक्षा नहीं मिल सकी है, जिससे वे अपने और अपने परिवार के भविष्य को लेकर निश्चिंत हो सकें।

कर्मचारियों का सवाल है कि जब उनसे वर्षों से लगातार जिम्मेदारियां निभाई जा रही हैं, तब उनके नियमितीकरण और स्थायी समायोजन पर ठोस निर्णय लेने में देरी क्यों हो रही है? क्या लंबे समय तक सेवा लेने के बाद भी कर्मचारियों को अनिश्चितता में रखना उचित है? संघ ने सरकार से इस स्थिति को समाप्त कर तकनीकी सहायकों के लिए स्पष्ट और स्थायी व्यवस्था बनाने की मांग की है।

तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ ने अपनी मांगों को लेकर तीन प्रमुख मुद्दे उठाए हैं। पहली मांग है कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत कार्यरत सभी तकनीकी सहायकों के लिए नियमित पद सृजित कर उनका समायोजन किया जाए। संघ का मानना है कि लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को सेवा की स्थिरता प्रदान करना जरूरी है।

दूसरी मांग नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक ग्राम पंचायत सचिवों की तर्ज पर स्थायीकरण नियमावली लागू करने की है, ताकि कर्मचारियों को कम से कम सेवा संबंधी सुरक्षा मिल सके। तीसरी मांग तकनीकी सहायकों का पदनाम बदलकर कनिष्ठ अभियंता (वीबी-जी राम जी) करने की है।

संघ का कहना है कि इन मांगों पर निर्णय होने से न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि उनकी जिम्मेदारियों और कार्य की प्रकृति के अनुरूप सेवा व्यवस्था भी विकसित हो सकेगी।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने कामकाज के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया है। संघ के अनुसार, योजना को मांग आधारित व्यवस्था के बजाय लक्ष्य आधारित तरीके से संचालित करने के कारण तकनीकी सहायकों पर अत्यधिक दबाव पड़ रहा है। इससे उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की शिकायत की गई है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर भी संघ ने आपत्ति जताई है। कर्मचारियों का कहना है कि इस योजना के लिए अलग व्यवस्था होने के बावजूद आवास निर्माण के लक्ष्य पूरे करने का दबाव तकनीकी सहायकों पर डाला जाता है। लक्ष्य पूरा नहीं होने की स्थिति में वेतन काटने या निलंबन की धमकियां मिलने का आरोप भी लगाया गया है।

संघ ने मांग की है कि कर्मचारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की जाएं और उन्हें उन कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से जवाबदेह नहीं बनाया जाए, जिनके लिए अलग प्रशासनिक व्यवस्था निर्धारित है। कर्मचारियों के मुताबिक, जवाबदेही तय करते समय उपलब्ध संसाधनों, कार्यभार और वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।

तकनीकी सहायकों की नाराजगी का एक बड़ा कारण वेतन संबंधी समस्याएं भी हैं। संघ ने ज्ञापन में दावा किया है कि पिछले तीन वर्षों से वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं हुई है। इसके अलावा कई-कई महीनों तक वेतन का भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है।

महंगाई के दौर में नियमित आय ही परिवार की जरूरतों, बच्चों की शिक्षा, आवास और अन्य खर्चों का आधार होती है। ऐसे में वेतन भुगतान में लगातार देरी और वार्षिक वृद्धि नहीं होने की शिकायत कर्मचारियों की मुश्किलों को और बढ़ा रही है। संघ ने नियमानुसार यात्रा भत्ता नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया है।

कर्मचारियों की मांग है कि वेतन भुगतान की व्यवस्था नियमित की जाए, लंबित भुगतान का निराकरण किया जाए और नियमानुसार मिलने वाले वित्तीय लाभ सुनिश्चित किए जाएं।

लंबे समय से लंबित मांगों पर कार्रवाई नहीं होने से नाराज संघ ने आंदोलन का कार्यक्रम भी घोषित किया है। कलेक्टर, बिलासपुर के माध्यम से शासन को ज्ञापन और चेतावनी भेजते हुए कर्मचारियों ने चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा सामने रखी है।

संघ के घोषित कार्यक्रम के अनुसार, 13 और 14 अक्टूबर 2026 को सभी जिलों में जिला स्तर पर हड़ताल की जाएगी। इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर में प्रदेश स्तरीय सांकेतिक हड़ताल, विशाल रैली और ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

संघ ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, वेतन विसंगतियों और कार्यस्थल पर आ रही समस्याओं के समाधान के लिए किया जा रहा है। यदि शासन स्तर पर उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक पहल नहीं हुई, तो आंदोलन को अगले चरण में और तेज किया जाएगा।

तकनीकी सहायक कर्मचारी संघ की मांगों ने ग्रामीण विकास योजनाओं में लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों की स्थिति और उनकी सेवा सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए कर्मचारियों से लक्ष्य पूरे करने की अपेक्षा की जाती है, वहीं दूसरी ओर नियमितीकरण, वेतन वृद्धि और समय पर भुगतान जैसी बुनियादी मांगों को लेकर आंदोलन की नौबत आना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय है।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पंचायत मंत्री विजय शर्मा कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल संघ ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है—20 वर्षों की सेवा के बाद भी अनिश्चित भविष्य स्वीकार नहीं, अब मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए।

यदि शासन समय रहते समाधान की दिशा में पहल करता है, तो टकराव की स्थिति को टाला जा सकता है। अन्यथा 15 अक्टूबर को राजधानी रायपुर में प्रस्तावित प्रदेश स्तरीय आंदोलन सरकार के सामने कर्मचारियों की नाराजगी का बड़ा संदेश बन सकता है।

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