आस्थादेश

मौत बनकर दौड़ा बेकाबू ट्रक! शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं को रौंदा, 12 की दर्दनाक मौत, 40 घायल; बैरिकेड्स तोड़कर मंदिर के गेट तक पहुंचा ट्रक….

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में नवरात्रि के पावन अवसर पर शनिवार देर रात आस्था का केंद्र बने शीतला माता मंदिर के पास ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को दहला दिया। माता के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं के बीच अचानक मौत बनकर दौड़े एक बेकाबू ट्रक ने कई लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण हादसे में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 लोग घायल बताए गए हैं। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार, अफरातफरी और अपनों को तलाशते परिजनों का दर्दनाक मंजर देखने को मिला।

हादसा शनिवार और रविवार की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे छिनोर की ओर से शीतला माता मंदिर आने वाली सड़क पर हुआ। नवरात्रि के चलते मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही थी। इसी दौरान धान से लदा एक ट्रक कथित तौर पर पुलिस बैरिकेड्स तोड़ते हुए ढलान वाली सड़क पर अनियंत्रित हो गया। बेकाबू ट्रक नीचे की ओर तेजी से आया और मंदिर की बाहरी दीवार तथा गेट से जा टकराया। रास्ते में मौजूद श्रद्धालु उसकी चपेट में आ गए। किसी को संभलने तक का मौका नहीं मिला और देखते ही देखते खुशियों तथा आस्था से भरी रात मातम में बदल गई।

ग्वालियर के एसएसपी धर्मवीर सिंह के मुताबिक, नवरात्रि के दौरान मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे थे। छिनोर की ओर से आने वाली सड़क पर खड़ी ढलान है और इस मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। इसके बावजूद धान से लदा ट्रक पुलिस बैरिकेड्स तोड़कर अंदर कैसे पहुंचा, यह हादसे का सबसे बड़ा सवाल बन गया है।

जब श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स और पुलिस चेक-पॉइंट लगाए गए थे, तो भारी वाहन उन बाधाओं को पार कर मंदिर तक कैसे पहुंच गया? क्या ट्रक की गति पर नियंत्रण नहीं था, क्या चालक ने लापरवाही बरती या वाहन में कोई तकनीकी खराबी आई? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा। हालांकि, घटना ने भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर यातायात नियंत्रण और सुरक्षा इंतजामों की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

एसएसपी धर्मवीर सिंह के अनुसार, घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती जानकारी में 12 लोगों की मौत की पुष्टि की गई, जबकि कई घायलों की हालत गंभीर बताई गई। पांच से छह मरीजों को गंभीर चोटें और फ्रैक्चर होने की जानकारी सामने आई है। हादसे में मौके पर तैनात दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही एम्बुलेंस और अन्य वाहनों को घटनास्थल पर भेजा गया। घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। प्रशासन के मुताबिक, हादसे में कई लोगों को अलग-अलग तरह की चोटें आई हैं। मृतकों और घायलों की अंतिम संख्या तथा उनकी पहचान की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

घटनास्थल पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि ट्रक अचानक आया और लोगों को कुचलता हुआ आगे बढ़ गया। उसके मुताबिक, कुछ लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। प्रत्यक्षदर्शी ने ट्रक में क्षमता से अधिक सामान लदे होने का भी दावा किया और बताया कि वाहन ने कुछ दुकानों को भी नुकसान पहुंचाया। इस हादसे में उसके भाई को भी चोटें आई हैं।

प्रत्यक्षदर्शी के बयान ने हादसे की भयावहता को सामने ला दिया है। जिस सड़क से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए गुजर रहे थे, उसी रास्ते पर अचानक बेकाबू भारी वाहन का पहुंचना कई परिवारों के लिए कभी न भूलने वाला दर्द बन गया। हादसे के बाद मौके पर अफरातफरी मची रही और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए राहत कार्य चलाया गया।

कलेक्टर रुचिका चौहान ने बताया कि संबंधित सड़क पर स्टॉपर और पुलिस चेक-पॉइंट मौजूद था। इसके बावजूद ट्रक प्रतिबंधित मार्ग पर कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है। ट्रक की तकनीकी स्थिति और हादसे के संभावित कारणों का पता लगाने के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) की टीम को भी भेजा गया है।

जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ट्रक के ब्रेक, स्टीयरिंग और अन्य तकनीकी प्रणालियां ठीक थीं या नहीं। साथ ही, वाहन की गति, चालक की भूमिका, ओवरलोडिंग के आरोप और बैरिकेड्स टूटने की परिस्थितियों की भी पड़ताल की जानी चाहिए। जांच के निष्कर्ष ही यह बताएंगे कि यह हादसा मानवीय लापरवाही, तकनीकी खराबी या किसी अन्य कारण से हुआ।

नवरात्रि के दौरान देशभर के मंदिरों में लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे समय में भारी वाहनों का प्रवेश रोकना, ढलान वाली सड़कों पर अतिरिक्त निगरानी रखना, बैरिकेड्स को प्रभावी बनाना और आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त व्यवस्था करना प्रशासन की अहम जिम्मेदारी होती है।

ग्वालियर का यह हादसा एक बड़ा सवाल छोड़ गया है—जब मंदिर जाने वाले मार्ग पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था और पुलिस चेक-पॉइंट भी मौजूद था, तो आखिर सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर ट्रक श्रद्धालुओं के बीच कैसे पहुंच गया? यदि जांच में सुरक्षा संबंधी चूक सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय करना भी उतना ही जरूरी होगा।

फिलहाल हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, जबकि घायल अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं। जरूरत केवल हादसे की वजह जानने की नहीं, बल्कि उन खामियों को उजागर करने की भी है, जिनकी पुनरावृत्ति रोककर भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसा असहनीय दर्द झेलने से बचाया जा सके।

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