Saturday, May 23, 2026
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सड़कों पर स्टंटबाजी और रीलबाजी पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख: स्वतः संज्ञान लेकर मुख्य सचिव से पूछा सवाल– अब तक क्या कार्रवाई हुई…

बिलासपुर की सड़कों पर फिल्मी अंदाज़ में रील, स्टंट और नाच-गाने का तमाशा अब सिर्फ सोशल मीडिया की सुर्खियों में ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त निगाह में भी आ गया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने बिलासपुर से जुड़े तीन हाईप्रोफाइल मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य शासन से दो टूक सवाल किया है – अब तक इन मामलों में क्या कार्रवाई की गई? और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए क्या योजना है?

तीन हाईप्रोफाइल मामले, एक जैसी लापरवाही

हाईकोर्ट ने जिन मामलों पर नाराजगी जताई है, उनमें शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ाते हुए रईसजादों और युवाओं का दिखावा सामने आया।

  1. लक्जरी काफिले का ‘शो ऑफ’
    पहला मामला उस समय सुर्खियों में आया, जब एक युवक ने अपनी नई लक्जरी कार शो-रूम से निकालते ही शहर में ‘डर का माहौल’ बनाने वाली एंट्री की। छह काले रंग की महंगी गाड़ियां, ड्रोन कैमरा, हाईटेक शूटिंग और तेज़ बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ नेशनल हाईवे पर रील बनाई गई। कुछ समय के लिए जाम की स्थिति भी बन गई। मीडिया रिपोर्ट के बाद पुलिस ने गाड़ियों को जब्त कर चालानी कार्रवाई की।
  2. सनरूफ से खतरनाक स्टंट
    दूसरा मामला रिवर व्यू क्षेत्र का है, जहां कुछ युवकों ने चलती कार के सनरूफ में खड़े होकर खतरनाक अंदाज में रील बनाई। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने चार युवकों को गिरफ्तार किया।
  3. सड़क पर केक काटकर ‘खलनायक’ बनना
    तीसरी घटना फिल्म अभिनेता संजय दत्त के जन्मदिन पर हुई। उनका फैन चित्तू अवस्थी अपने साथियों के साथ मुख्य सड़क के बीचोंबीच केक काटता है, “जी हां, मैं हूं खलनायक” गाने पर नाचता है और रील बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट करता है। पुलिस ने इस मामले में भी गिरफ्तारी की।

हाईकोर्ट का सख्त रुख

इन तीनों घटनाओं को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया और छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव से लिखित जवाब मांगा है। कोर्ट ने साफ किया कि इस तरह की घटनाएं न सिर्फ यातायात व्यवस्था के लिए खतरा हैं, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ करती हैं।

अगली सुनवाई पर टिकी नज़र

अब अगली सुनवाई में देखना होगा कि राज्य सरकार इन ‘स्टंटबाजों’ और ‘रीलबाजों’ पर लगाम कसने के लिए क्या ठोस योजना पेश करती है और हाईकोर्ट उसके जवाब पर क्या रुख अपनाता है।

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