बिलासपुर। कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर कांग्रेस का विरोध अब सड़कों पर खुलकर दिखाई देने लगा है। सोमवार को बिलासपुर में जिला शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा और जिला ग्रामीण कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कलेक्टर कार्यालय के सामने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। पुतला दहन के दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच छीना-झपटी की स्थिति भी बनी।
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तत्काल पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई तथा गिरफ्तारी की मांग उठाई।
कांग्रेस ने अपने ज्ञापन में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी ने दावा किया कि पिछले करीब 10 महीनों के दौरान निर्वाचन आयोग के भीतर ही कई फैसलों को लेकर आपत्तियां सामने आईं। कांग्रेस ने विशेष रूप से तत्कालीन मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार और वर्तमान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस के निशाने पर मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR भी है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची में नए नाम जोड़ने, नाम हटाने, फॉर्म-6 से जुड़े बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं।
हाल के दिनों में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक विवाद तेज हुआ है। एक रिपोर्ट में निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों द्वारा SIR और मतदाता डेटा से जुड़े कुछ फैसलों पर आपत्तियां दर्ज किए जाने का दावा किया गया था। निर्वाचन आयोग ने हालांकि कहा है कि आयोग के फैसले सामूहिक और सर्वसम्मति से लिए गए हैं तथा आंतरिक विचार-विमर्श में अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है।

कांग्रेस का यह प्रदर्शन केवल स्थानीय विरोध तक सीमित नहीं है। पार्टी ने देशभर में मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया है। 28 सितंबर को जिला कांग्रेस कमेटियों द्वारा कलेक्टरेट स्तर पर प्रदर्शन किए जाने की घोषणा भी कांग्रेस की ओर से की गई थी।
बिलासपुर में पुतला दहन और ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने साफ संकेत दिया कि वह चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के मुद्दे को अब स्थानीय स्तर पर भी बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने जा रही है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता सूची और मतदान प्रक्रिया पर जनता का भरोसा सर्वोपरि है। पार्टी ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप करते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
हालांकि, कांग्रेस द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ और चुनावी अनियमितताओं के आरोप पार्टी के आरोप और राजनीतिक दावे हैं। निर्वाचन आयोग इन आरोपों को स्वीकार नहीं करता और SIR से जुड़े फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा बताता है। इसलिए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया से ही होगी।
बिलासपुर का यह प्रदर्शन अब एक बड़े सवाल की ओर इशारा कर रहा है—क्या मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर उठे सवालों का जवाब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से मिलेगा या फिर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध दस्तावेजों और स्वतंत्र जांच के जरिए? आने वाले दिनों में यही मुद्दा कांग्रेस के आंदोलन की दिशा तय कर सकता है।


