Wednesday, March 11, 2026
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बिलासपुर: भूत भगाने के नाम पर कोर्रा और लाठी से मारपीट, नशे में धूत शराबी की हुई मौत, चार आरोपी गिरफ्तार…

धाना- मस्तूरी, जिला- बिलासपुर

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र के देवगांव में अंधविश्वास के कारण एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां भूत-प्रेत और जादू-टोने के शक में एक युवक के साथ उसके ही परिजनों ने बेरहमी से मारपीट की, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, मृतक सरोज खाण्डेकर (35) देवगांव निवासी था। 12 फरवरी 2025 को ग्राम पंचायत चुनाव में सरपंच प्रत्याशियों द्वारा गांववासियों के लिए चिकन पार्टी और शराब का आयोजन किया गया था। सरोज ने भी इस पार्टी में भाग लिया और अत्यधिक शराब के सेवन के कारण उसकी तबीयत खराब हो गई। अचानक वह जमीन पर गिर पड़ा, जिसे देखकर उसके छोटे भाई शैलेन्द्र और मुकेश खाण्डेकर ने सोचा कि उस पर भूत-प्रेत का साया है।

इसके बाद, उन्होंने अपने बड़े भाई मनोज खाण्डेकर और पिता गोरेलाल खाण्डेकर को झाड़-फूंक के लिए बुलाया। अंधविश्वास के चलते सभी ने सरोज के साथ मारपीट शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि मृतक को कोर्रा (चमड़े का कोड़ा) और बांस की छड़ी से पीटा गया और गालियां दी गईं।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की। गवाहों के बयान और वायरल वीडियो के आधार पर चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने धारा 296, 115(2), 3(5) बीएनएस तथा छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 की धारा 4, 5, 6 और 8 के तहत अपराध कायम किया।

गिरफ्तार आरोपी:

  1. शैलेन्द्र खाण्डेकर (35)
  2. मुकेश खाण्डेकर (30)
  3. मनोज खाण्डेकर (42)
  4. गोरेलाल खाण्डेकर (69)

इन सभी को पुलिस ने 27 फरवरी 2025 को गिरफ्तार किया और 28 फरवरी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया। आरोपियों ने पूछताछ में अपराध स्वीकार किया और घटना में प्रयुक्त कोर्रा व बांस की छड़ी पुलिस ने जब्त कर ली।

अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी

यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास और कुरीतियों को उजागर करती है। छत्तीसगढ़ में टोनही प्रताड़ना जैसी घटनाएं अब भी होती हैं, जो मानवाधिकारों का उल्लंघन है। पुलिस और प्रशासन को इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में कोई और निर्दोष व्यक्ति अंधविश्वास की भेंट न चढ़े।

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