बिलासपुर। शहर में संचालित महर्षि यूनिवर्सिटी ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान, मंगला के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सोमवार 16 मार्च 2026 को एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह के नेतृत्व में छात्र प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन और कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में एनएसयूआई ने आरोप लगाया कि महर्षि यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध महर्षि शिक्षा संस्थान में लंबे समय से नियमों के विरुद्ध डी.एल.एड. पाठ्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। साथ ही एक ही भूमि और भवन में दो अलग-अलग संस्थानों के नाम से पाठ्यक्रम संचालित करने, प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना करने और शासकीय विभागों को भ्रामक जानकारी देने जैसे गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने बताया कि विभिन्न नियामक संस्थाओं और शासकीय विभागों द्वारा गठित जांच समितियों की रिपोर्ट में भी इन अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है। इसके बावजूद अब तक संस्थान के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जो कई सवाल खड़े करता है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग (CGPURC) द्वारा निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) अधिनियम 2005 की धारा 41(1) के तहत विश्वविद्यालय को बंद करने या प्रशासक नियुक्त करने की अनुशंसा तक की जा चुकी है। इसके अलावा संस्थान में अध्ययनरत छात्रों को पिछले तीन वर्षों से छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है, डी.एल.एड. पाठ्यक्रम को बंद करने का आदेश जारी हो चुका है और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा डी.एल.एड. अभ्यर्थियों के इंटर्नशिप (शाला अनुभव) कार्यक्रम पर भी रोक लगा दी गई है।
एनएसयूआई ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले सत्र के डी.एल.एड. परीक्षा परिणाम में दो अलग-अलग संस्थानों के प्राचार्यों के नाम से एक ही व्यक्ति द्वारा हस्ताक्षर किए जाने का मामला सामने आया है। वहीं विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा भी संबंधित विश्वविद्यालय को डिफॉल्टर घोषित किया जा चुका है।
रंजीत सिंह ने मीडिया के माध्यम से राज्य सरकार और प्रशासन से सवाल करते हुए कहा कि आखिर ऐसी विवादित शैक्षणिक संस्था को किसका संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण बिलासपुर में शिक्षा के नाम पर खुलेआम व्यापार किया जा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि जब उनके द्वारा संस्थान में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायत विभिन्न नियामक संस्थाओं और पुलिस विभाग में की गई, तो संस्थान प्रबंधन ने उनके खिलाफ न्यायालय में प्रकरण दर्ज कराया। इस मामले में वे वर्तमान में उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच में न्यायिक लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद संस्थान के कुलसचिव द्वारा कलेक्टर के समक्ष न्यायालयीन प्रकरण के संबंध में झूठी और भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने का आरोप भी लगाया गया है।
एनएसयूआई ने मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलसचिव डॉ. विजय गारुडिक और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की जाए तथा नियमविरुद्ध संचालित डी.एल.एड. पाठ्यक्रम सहित अन्य गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कर आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
संगठन ने यह भी मांग की कि वर्तमान में अध्ययनरत छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और आगामी शैक्षणिक सत्र में नए प्रवेश पर पूर्ण रूप से रोक लगाई जाए।
इस संबंध में कलेक्टर बिलासपुर ने प्रकरण को गंभीर बताते हुए सचिव, उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन को आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र भेजने तथा पुलिस अधीक्षक बिलासपुर द्वारा संचालक उच्च शिक्षा विभाग, एससीईआरटी और एनसीटीई को पत्राचार करने का आश्वासन दिया है।
एनएसयूआई जिलाध्यक्ष रंजीत सिंह ने चेतावनी दी कि यदि 10 दिनों के भीतर इस मामले में कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं की गई, तो एनएसयूआई द्वारा महर्षि यूनिवर्सिटी एवं महर्षि शिक्षा संस्थान परिसर में धरना-प्रदर्शन कर छात्रहित में आंदोलन किया जाएगा।
इस दौरान एनएसयूआई के प्रदेश सचिव लोकेश नायक, बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव, जिला उपाध्यक्ष सुमित शुक्ला, जिला महासचिव शिवांश पाठक, प्रवीण साहू, सुबोध नायक, विपिन साहू, पुष्कर पाल, उमेश पटेल सहित कई छात्र पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।


