Monday, March 23, 2026
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नारायणा ई-टेक्नो स्कूल पर शिकंजा कसने की मांग, जांच पूरी होने तक नए प्रवेश और संचालन पर रोक लगाने की उठी आवाज…

बिलासपुर। शहर के नेहरू नगर स्थित नारायणा ई-टेक्नो स्कूल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गया है। जिला कलेक्टर को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में स्कूल प्रबंधन पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत में दावा किया गया है कि स्कूल द्वारा लंबे समय तक CBSE के नाम पर अभिभावकों से भारी-भरकम फीस वसूली गई, जबकि वास्तविक मान्यता की स्थिति संदिग्ध रही।

ज्ञापन में कहा गया है कि स्कूल का संचालन कई स्तरों पर नियमों के विपरीत प्रतीत होता है। आरोप है कि संस्थान के पास कोई स्वतंत्र बैंक खाता नहीं है और विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस सीधे केंद्रीय खाते में ट्रांसफर की जा रही है। इसके अलावा स्थानीय स्तर पर किसी भी जिम्मेदार प्रतिनिधि, गारंटर या उत्तरदायी सदस्य की कार्यकारिणी में भागीदारी नहीं होने की बात भी सामने आई है।

शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि स्कूल की विभिन्न शाखाएं किराए के भवनों में संचालित हो रही हैं और कर्मचारियों की नियुक्ति, वेतन भुगतान तथा प्रशासनिक प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। साथ ही, सोसायटी पंजीयन, राज्य मान्यता और वित्तीय लेन-देन से जुड़े कई बिंदुओं पर गंभीर अनियमितताओं की आशंका जताई गई है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ राज्य के शिक्षा नियमों और मध्यप्रदेश सोसायटी पंजीयन अधिनियम 1973 के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। इससे न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और अभिभावकों के आर्थिक हित भी प्रभावित हो सकते हैं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही, यह भी अनुरोध किया गया है कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक स्कूल में नए प्रवेश पर तत्काल रोक लगाई जाए या उसके संचालन पर अस्थायी प्रतिबंध (स्टे) लगाया जाए।

ज्ञापन की प्रतिलिपि स्कूल शिक्षा विभाग, सीबीएसई क्षेत्रीय कार्यालय रायपुर, श्रम एवं रोजगार विभाग, पीएफ और ईएसआईसी सहित कई संबंधित विभागों को भी भेजी गई है, जिससे मामले में व्यापक स्तर पर जांच सुनिश्चित हो सके।

इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली, नियामकीय निगरानी और शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

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