Tuesday, January 13, 2026
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विधायक सुशांत शुक्ला और प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे के बीच सरेआम तीखी नोकझोंक, केंद्रीय मंत्री को करना पड़ा हस्तक्षेप…

बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के “यूनिटी मार्च” का उद्देश्य जहां एकता और संगठनात्मक मजबूती का संदेश देना था, वहीं बिलासपुर में आयोजित यह कार्यक्रम पार्टी की अंदरूनी खींचतान का उदाहरण बन गया। कार्यक्रम के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला और प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे के बीच सरेआम विवाद हो गया। दोनों नेताओं के बीच हुई तीखी नोकझोंक का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

जानकारी के अनुसार, रविवार को बीजेपी का यूनिटी मार्च बिलासपुर के तिफरा क्षेत्र से शुरू हुआ था। यात्रा की अगुवाई केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू कर रहे थे। उनके साथ पहली पंक्ति में कई वरिष्ठ नेता चल रहे थे। इसी दौरान बीजेपी विधायक सुशांत शुक्ला और प्रदेश मंत्री हर्षिता पांडे के बीच यह विवाद सामने आया।

दरअसल, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू के साथ फर्स्ट लाइन में चलने को लेकर दोनों के बीच तनातनी शुरू हुई। बताया जाता है कि हर्षिता पांडे मंत्री तोखन साहू के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगीं, जिससे विधायक सुशांत शुक्ला को पीछे सेकेंड लाइन में चलना पड़ा। कुछ दूरी चलने के बाद जब शुक्ला दोबारा आगे बढ़कर तोखन साहू के बगल में आने की कोशिश करने लगे, तो हर्षिता पांडे भड़क उठीं। बातों-बातों में दोनों के बीच तेज बहस शुरू हो गई, जो देखते ही देखते सरेआम नोकझोंक में बदल गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों नेता एक-दूसरे पर आरोप लगाते हुए “देख लेंगे” जैसी बातें करते नजर आए। स्थिति को बिगड़ते देख केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक को बीच-बचाव करना पड़ा। काफी समझाइश के बाद दोनों नेताओं को शांत कराया गया।

यह घटना उस समय हुई जब यूनिटी मार्च का मकसद संगठनात्मक सामंजस्य और टीमवर्क का प्रदर्शन करना था। लेकिन नेताओं की इस सार्वजनिक तकरार ने न केवल पार्टी की छवि पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि स्थानीय स्तर पर गुटबाजी की चर्चाओं को भी हवा दे दी है।

मार्च में शामिल अन्य कार्यकर्ताओं का कहना था कि इस तरह की घटनाएँ जनता के बीच गलत संदेश देती हैं। वहीं पार्टी सूत्रों ने बताया कि मामले की जानकारी उच्च नेतृत्व तक पहुँचा दी गई है और दोनों नेताओं से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।

फिलहाल, इस विवाद ने बीजेपी के “यूनिटी मार्च” को चर्चा में ला दिया है — लेकिन उस कारण से नहीं, जिसके लिए यह आयोजित किया गया था।

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