रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग की संस्था ‘संवाद’ में वर्षों से चल रहे प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़े कथित करोड़ों रुपये के खेल पर अब सरकार ने बड़ा प्रहार किया है। लंबे समय से मिल रही शिकायतों और व्यवस्था में गड़बड़ियों की जानकारी मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक पहुंचने के बाद सिस्टम को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। इसके बाद जनसंपर्क विभाग ने ‘संवाद’ में वर्षों से जमे तंत्र के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह और जनसंपर्क सचिव रोहित यादव की गंभीरता के बाद जनसंपर्क आयुक्त एवं संवाद के सीईओ रजत बंसल ने कार्रवाई का मोर्चा संभाला। कार्रवाई की शुरुआत उस व्यवस्था पर चोट से हुई, जिस पर लंबे समय से सवाल उठते रहे थे।
संवाद के प्रिंटिंग विभाग में करीब 25 वर्षों से होलसोल इंचार्ज की जिम्मेदारी संभाल रहे सब्यसाची कर की बर्खास्तगी को सरकार की कार्रवाई का पहला बड़ा कदम माना जा रहा है। जांच में सामने आया कि वर्ष 2011 में ही एक जांच कमेटी ने उनकी नियुक्ति को अवैधानिक ठहराया था। इसके बावजूद यह मामला वर्षों तक आगे नहीं बढ़ा और संबंधित फाइल दबे रहने की बात सामने आई।
यह सवाल अब सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है कि जब वर्ष 2011 में ही नियुक्ति को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज हो चुकी थी, तो आखिर उसके बाद करीब डेढ़ दशक तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? किस स्तर पर फाइल रोकी गई और इतने वर्षों तक जिम्मेदारी निभाने की अनुमति किस आधार पर दी गई?
मामला केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं है। संवाद की होर्डिंग व्यवस्था भी अब जांच के घेरे में है। आरोप है कि सरकारी विज्ञापनों के लिए लगाए गए होर्डिंग को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही हटा दिया जाता था और उन्हीं स्थानों पर निजी विज्ञापन लगा दिए जाते थे। इसके बावजूद सरकारी विज्ञापन का पूरा भुगतान निकाल लिए जाने के आरोपों ने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अगर जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं तो मामला केवल विभागीय लापरवाही का नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग और विज्ञापन व्यवस्था में मिलीभगत का गंभीर मामला बन सकता है।
यही वजह है कि अब होर्डिंग व्यवस्था पर निगरानी और सत्यापन को सख्त किया जा रहा है। सरकारी विज्ञापन वास्तव में निर्धारित अवधि तक प्रदर्शित हुआ या नहीं, किस स्थान पर लगा, कब हटाया गया और उसके बाद वहां क्या विज्ञापन लगाया गया—इन तमाम बिंदुओं की निगरानी जरूरी मानी जा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकारी होर्डिंग हटाकर उसी स्थान पर निजी विज्ञापन लगाने का खेल लंबे समय से चलता रहा, तो इसकी जानकारी जिम्मेदार अधिकारियों को क्यों नहीं हुई? सरकारी भुगतान से पहले भौतिक सत्यापन की व्यवस्था थी या नहीं? यदि थी तो फिर सत्यापन किसने किया?
संवाद में हुई मौजूदा कार्रवाई ने वर्षों से चली आ रही पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रिंटिंग से लेकर होर्डिंग तक सरकारी धन खर्च होता है और ऐसे में हर भुगतान की जवाबदेही तय होना जरूरी है। यदि किसी काम का भुगतान कागजों में पूरा दिखाया गया, लेकिन जमीन पर उसकी स्थिति अलग थी, तो यह सरकारी व्यवस्था की गंभीर विफलता मानी जाएगी।
अब जरूरत केवल एक अधिकारी या कर्मचारी को हटाने की नहीं, बल्कि वर्षों के रिकॉर्ड की गहराई से जांच करने की है। पुराने टेंडर, वर्क ऑर्डर, प्रिंटिंग बिल, भुगतान रिकॉर्ड, होर्डिंग की लोकेशन, विज्ञापन की अवधि और वास्तविक साइट की स्थिति का मिलान किया जाना जरूरी है।
खासकर उन मामलों की जांच अहम होगी जहां सरकारी विज्ञापन की अवधि पूरी होने से पहले होर्डिंग हटाने और उसके स्थान पर निजी विज्ञापन लगाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। यदि इन मामलों में सरकारी भुगतान भी हुआ है, तो संबंधित लोगों की भूमिका और जिम्मेदारी तय करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
वर्ष 2011 की जांच से लेकर अब तक की पूरी फाइल भी कई सवालों के जवाब दे सकती है। नियुक्ति पर आपत्ति के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हुई? फाइल किस स्तर पर लंबित रही? इतने लंबे समय तक एक ही व्यक्ति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे संभालता रहा? और इस दौरान हुए वित्तीय लेनदेन की निगरानी किस स्तर पर होती रही?
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश के बाद शुरू हुई कार्रवाई से फिलहाल यह संकेत साफ है कि ‘संवाद’ में वर्षों से चली आ रही व्यवस्था अब पहले की तरह नहीं चलने वाली। लेकिन इस कार्रवाई की असली परीक्षा आगे होगी।
अब सवाल यह नहीं है कि एक व्यक्ति पर कार्रवाई हुई या नहीं। बड़ा सवाल यह है कि अगर वर्षों से व्यवस्था में गड़बड़ियां चल रही थीं तो उसकी जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कहां तक जाएगी?
सरकार ने ‘संवाद’ में क्लीन-अप ड्राइव की शुरुआत कर दी है। अब देखना यह होगा कि कार्रवाई सिर्फ एक बर्खास्तगी पर रुकती है या फिर प्रिंटिंग और होर्डिंग से जुड़े वर्षों पुराने पूरे तंत्र की परतें खोलकर जिम्मेदार लोगों तक पहुंचती है।


