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अरपांचल में सरकारी रावण दहन, फिर अलग नगर निगम की मांग पर सरकार मौन क्यों? 365 दिन की समस्याओं का समाधान कब? विजय केशरवानी…

बिलासपुर। अरपा नदी के पार बसे अरपांचल में पहली बार शासकीय स्तर पर रावण दहन का आयोजन होने जा रहा है। आयोजन को लेकर राजनीतिक सरगर्मी के बीच अब अरपांचल की वर्षों पुरानी अलग नगर निगम की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष एवं बेलतरा विधानसभा के पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय केशरवानी ने सवाल खड़ा किया है कि जब अरपांचल को शासकीय आयोजन के लिए शहर के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, तो फिर यहां की जनता को अलग नगर निगम की प्रशासनिक पहचान देने की पहल कब होगी?

केशरवानी ने सरकार और स्थानीय बेलतरा विधायक पर निशाना साधते हुए कहा कि क्या अरपांचल की जनता को सिर्फ बयानों और आश्वासनों से ही संतुष्ट किया जाता रहेगा? उनका कहना है कि अलग नगर निगम की मांग अब महज प्रशासनिक पुनर्गठन का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह अरपांचल के लाखों लोगों की भावनाओं और भविष्य से जुड़ा सवाल बन चुका है।

उन्होंने कहा कि अरपांचल अब शहर का कोई छोटा या उपेक्षित हिस्सा नहीं है। नगर निगम के कुल 70 वार्डों में से 24 वार्ड अरपांचल क्षेत्र में आते हैं। इतनी बड़ी आबादी और इतने बड़े भू-भाग के बावजूद सड़क, नाली, जलनिकासी, स्वच्छता, यातायात, जलभराव और बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोगों की परेशानियां लगातार सामने आती रही हैं।

समस्याएं 365 दिन की

केशरवानी ने कहा कि उनका सवाल शासकीय रावण दहन के आयोजन पर नहीं है। सवाल यह है कि अगर अरपांचल को शासकीय स्तर पर बड़े आयोजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तो फिर यहां की स्थायी समस्याओं और अलग प्रशासनिक व्यवस्था की मांग पर सरकार की गंभीरता दिखाई क्यों नहीं देती?

उन्होंने कहा, “रावण दहन एक दिन होगा, लेकिन सड़क की समस्या 365 दिन रहती है। जलभराव कुछ घंटे या कुछ दिन की खबर बन सकता है, लेकिन जिस परिवार के घर में पानी भरता है, उसकी परेशानी महीनों और वर्षों तक रहती है।”

बारिश के दौरान अरपांचल के कई इलाकों में जलभराव को लेकर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि यहां रहने वाले परिवारों के लिए बारिश केवल मौसम परिवर्तन नहीं, बल्कि डर और चिंता लेकर आती है। घरों में पानी घुसने से बच्चों की किताबें, जरूरी सामान, बुजुर्गों की दवाइयां और वर्षों की मेहनत प्रभावित होती है।

केशरवानी ने कहा कि “जिस मां को बारिश की रात अपने बच्चों को सुरक्षित रखने की चिंता में नींद न आए और जिस पिता को घर के भीतर बढ़ते पानी के बीच परिवार की सुरक्षा की चिंता सताए, उससे सिर्फ कागजों में विकास की बात नहीं की जा सकती।”

लाखों की आबादी और सवाल वही

केशरवानी ने कहा कि अरपांचल में नगर निगम के 24 वार्ड हैं। यह संख्या अपने आप में क्षेत्र के आकार और आबादी की तस्वीर बताती है। इसके बावजूद अनेक इलाकों में नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

उन्होंने सवाल किया कि अगर अरपांचल इतना बड़ा है कि यहां 24 नगर निगम वार्ड हैं, तो फिर इसकी समस्याओं को उसी गंभीरता से क्यों नहीं देखा जाता? क्या यहां के नागरिकों को बेहतर सड़क, व्यवस्थित जलनिकासी, स्वच्छ वातावरण और सुरक्षित आवागमन का अधिकार नहीं है?

उनके मुताबिक अलग नगर निगम की मांग सिर्फ नया कार्यालय या प्रशासनिक सीमा खींचने की मांग नहीं है। यह ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की मांग है, जो क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों के अनुसार तेजी से निर्णय ले सके और जनता की समस्याओं तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

अरपांचल की तस्वीर बदल चुकी है

केशरवानी ने कहा कि अरपांचल को सिर्फ रिहायशी क्षेत्र मानना अब वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है। क्षेत्र में SECL मुख्यालय, Apollo Hospital, Central University, Atal Bihari Vajpayee University और Pandit Sundarlal Sharma Open University जैसी महत्वपूर्ण संस्थाएं मौजूद हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों की दृष्टि से अरपांचल की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने सवाल उठाया, “जहां SECL जैसी बड़ी संस्था मौजूद हो, जहां बड़े अस्पतालों में प्रदेशभर से मरीज आते हों, जहां विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा के बड़े संस्थान हों, वहां के क्षेत्र को सिर्फ शहर का किनारा कैसे माना जा सकता है?”

उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास की रफ्तार अब केवल आबादी के विस्तार तक सीमित नहीं है। स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और शहरीकरण के साथ अरपांचल आने वाले वर्षों में बिलासपुर के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल होगा। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था को भी भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना होगा।

मरीज के रास्ते की चिंता कौन करेगा?

अरपांचल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का जिक्र करते हुए केशरवानी ने कहा कि Apollo Hospital सहित बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के साथ मल्टी सुपर स्पेशियलिटी और कैंसर अस्पताल जैसी सुविधाओं की दिशा में बढ़ती गतिविधियां क्षेत्र के भविष्य को स्पष्ट करती हैं।

उन्होंने कहा, “अस्पताल आधुनिक हो सकता है, लेकिन अगर मरीज को अस्पताल तक पहुंचने के रास्ते में जलभराव और खराब सड़क से जूझना पड़े तो विकास की तस्वीर अधूरी है।”

उनका कहना है कि जब किसी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का इतना बड़ा नेटवर्क विकसित हो रहा हो, तब सड़क, जलनिकासी, ट्रैफिक व्यवस्था और आपातकालीन आवागमन जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है।

अब प्रशासनिक अधिकार भी दीजिए

केशरवानी ने कहा कि शासकीय रावण दहन का आयोजन इस बात का संकेत है कि अरपांचल अब शासन और प्रशासन की नजर में महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुका है।

उन्होंने कहा, “मेरा सवाल रावण दहन को लेकर नहीं है। सवाल अरपांचल के भविष्य को लेकर है। अगर इस क्षेत्र को शासकीय स्तर पर बड़े आयोजन के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, तो यहां रहने वाली जनता की वर्षों पुरानी प्रशासनिक पहचान की मांग को भी गंभीरता से क्यों नहीं लिया जाना चाहिए?”

उन्होंने कहा कि आयोजन एक दिन का होता है, लेकिन जनता की समस्याएं पूरे साल रहती हैं।

“रावण दहन के मंच से अरपांचल की पहचान हो सकती है, लेकिन अरपांचल की जनता को सिर्फ मंच की पहचान नहीं चाहिए। उसे स्थायी विकास और प्रभावी प्रशासन चाहिए।”

अब ज्ञापन नहीं

केशरवानी ने स्पष्ट किया कि अलग नगर निगम की मांग को अब केवल ज्ञापन और राजनीतिक बयानों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि अरपांचल के हर मोहल्ले, हर वार्ड और हर परिवार तक पहुंचकर लोगों से संवाद किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अलग नगर निगम की मांग को लेकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा और जनता की भावना एवं सहमति के आधार पर आगे लोकतांत्रिक तरीके से जनआंदोलन की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।

उन्होंने कहा, “यह किसी व्यक्ति के खिलाफ लड़ाई नहीं है और न ही किसी आयोजन के खिलाफ। यह अरपांचल की जनता के बेहतर भविष्य की आवाज है।”

बेलतरा विधायक से सीधा सवाल

विजय केशरवानी ने सरकार और स्थानीय बेलतरा विधायक से सीधा सवाल करते हुए कहा कि जब अरपांचल में शासकीय स्तर पर आयोजन हो सकता है, जब यहां नगर निगम के 24 वार्ड हैं, जब SECL जैसी संस्था, बड़े अस्पताल, विश्वविद्यालय और भविष्य की सुपर स्पेशियलिटी एवं कैंसर जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं का इतना बड़ा क्षेत्र मौजूद है, तो फिर अरपांचल को अलग नगर निगम की प्रशासनिक पहचान देने की ठोस पहल कब होगी?

उन्होंने कहा, “अरपांचल के लोग कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं। वे अपने क्षेत्र के विकास, अपने परिवार की सुरक्षा और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य का अधिकार मांग रहे हैं।”

अब सवाल सिर्फ रावण दहन का नहीं है। सवाल यह है कि क्या अरपांचल को सिर्फ शासकीय आयोजनों में याद किया जाएगा या फिर उसकी वर्षों पुरानी अलग नगर निगम की मांग पर सरकार कोई ठोस फैसला भी लेगी?

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