बिलासपुर

ताजाखबर36गढ़ की खबर का असर: सकरी वितरक नहर की आड़ में करोड़ों के घोटाले पर शासन ने बिठाई जांच…कलेक्टर से मांगी रिपोर्ट…जानिए क्या है पूरा मामला…

बिलासपुर। अरपा भैसाझार परियोजना के तहत सकरी वितरक नहर बनाने के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में 15 करोड़ से अधिक का ख्ोल किया गया है। राज्य शासन ने इस मामले में कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है, जिस पर कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर ने एडीएम बीएस उइके के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच कमेटी बना दी है। कमेटी को जांच कर जल्द ही रिपोर्ट देने कहा गया है।

अरपा भैसाझार परियोजना के तहत सकरी वितरक नहर के लिए सिंचाई विभाग ने 19.95 एकड़ जमीन की जरूरत बताई थी। इसके लिए नक्शा भी बनाया गया था। भू-अर्जन करने के लिए सिंचाई विभाग ने कोटा एसडीएम को नहर के दायरे में आने वाली जमीन का खसरा नंबर और रकबा के दस्तावेज दे दिए थी। जब कोटा में कीर्तिमान राठौर एसडीएम थी, तब उन्होंने नहर के दायरे में आ रही जमीन का सर्वे कराया। उनके तबादले के बाद आए एसडीएम ने धारा 11 का प्रकाशन कराया और अवार्ड पारित करने के लिए प्रकरण बनाया। इस बीच उनका भी तबादला हो गया। उनकी जगह पर आए अफसर ने धारा 19 के तहत जमीन अधिग्रहण करने के लिए अखबारों में अधिसूचना प्रकाशित कराई और मुआवजा प्रकरण बनाया। उनके तबादला होने के बाद आनंदरूप तिवारी एसडीएम बने। उन्होंने 46 खसरा नंबर की कुल 19.95 एकड़ जमीन का 46 करोड़ रुपए से अधिक मुआवजा प्रकरण बनाया और किसानों को यह मुआवजा बांट दिया गया। इस बीच नहर भी बनाई जा रही है। दूसरी ओर, आनंदरूप तिवारी का तबादला तखतपुर हो गया है। उनके स्थान पर तुलाराम भारद्बाज को कोटा एसडीएम बनाया गया है। नहर की खुदाई आगे बढ़ते ही गड़बड़झाले की परत खुलने लगी। कई किसानों ने शिकायत की कि उन्हें अब तक मुआवजा नहीं मिला है और उनकी जमीन पर नहर निकाली जा रही है। यह शिकायत धीरे-धीरे राज्य शासन तक पहुंच गई। आरोप है कि मुआवजा की आड़ में करीब 2० करोड़ रुपए का गबन किया गया है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए राज्य शासन ने बीते दिनों बिलासपुर कलेक्टर को एक पत्र भेजा है, जिसमें शिकायतों का हवाला देते हुए सकरी वितरक नहर के लिए अधिग्रहित जमीनों को दिए गए मुआवजे की जांच कर रिपोर्ट मांगी गई है। कलेक्टर डॉ. मित्तर ने जांच के लिए जो कमेटी बनाई है, उसमें एडीएम, कोटा एसडीएम, तहसीलदार, सिंचाई विभाग के ईई को शामिल किया गया है।

7 एकड़ जमीन का फर्जी मुआवजा बांटने का आरोप
शासन को की गई शिकायत में बताया गया है कि नहर के दायरे में कुल 19.95 एकड़ जमीन आ रही है। इस जमीन को ही अधिग्रहित करना था, लेकिन भू-अर्जन अधिकारी व तत्कालीन एसडीएम आनंदरूप तिवारी ने नहर के दायरे से बाहर की 7 एकड़ जमीन का मुआवजा बांट दिया है। यह राशि करीब 15 करोड़ रुपए है।

कलेक्टर ने तिवारी को लगाई फटकार

कलेक्टर डॉ. मित्तर ने बीते मंगलवार की शाम कोटा के तत्कालीन एसडीएम व वर्तमान में तखतपुर एसडीएम आनंदरूप तिवारी को तलब किया। उन्होंने शासन से आए पत्र का हवाला देते हुए उन्हें जमकर फटकार लगाई। कलेक्टर ने एसडीएम तिवारी से कहा कि मुआवजे में जितनी भी गड़बड़ी की गई है, उसके एक-एक रुपए की वसूली की जिम्मेदारी उनकी है।

कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर बोले

राज्य शासन को सकरी वितरक नहर के मुआवजे को लेकर गड़बड़ी की शिकायत की गई थी। शासन ने इस मामले की जांच कराकर रिपोर्ट मांगी है। एडीएम बीएस उइके के नेतृत्व में जांच कमेटी बनाई गई है। रिपोर्ट आने पर शासन को भेज दी जाएगी।

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