स्वास्थ्य

चेतावनी: तीसरी लहर जैसे बिगड़ते हालात, गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकारों का कारण बन रहा है वायरस…

देश में कोरोना संक्रमण के दैनिक मामलों में उछाल लगातार जारी है। पिछले 24 घंटों में 12,213 नए मामले सामने आए जो पिछले दिन के आंकड़ों (8,822 मामलों) से 38.4 प्रतिशत अधिक है। 26 फरवरी के बाद यह पहला मौका है जब संक्रमण के आंकड़े एक दिन में 10,000 के पार गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक देश में सक्रिय कोविड-19 मामले अब बढ़कर 58,215 हो गए हैं। संक्रमण की लगातार बढ़ती रफ्तार डराने वाली है।

महाराष्ट्र देश में फिलहाल कोरोना से सबसे प्रभावित राज्य है, यहां पिछले 24 घंटे में 4024 केस सामने आए, यह पिछले दिन के मुकाबले 36 फीसदी अधिक है। यहां ओमिक्रॉन के अति-संक्रामक वैरिएंट्स BA.4 और BA.5 की पुष्टि के बाद से स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं दिल्ली में एक दिन में 1375 नए केस दर्ज किए गए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जिस तरह से देश में ओमिक्रॉन वैरिएंट के अति संक्रामक स्वरूपों के बार में पता चला है, ऐसे में सभी लोगों को लगातार विशेष सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता है।

संक्रमितों में देखी जा रही हैं गंभीर समस्याएं

अध्ययनों के आधार विशेषज्ञ, कोरोना संक्रमण के कारण होने वाले गंभीर शारीरिक दुष्प्रभावों को लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण के दौरान और ठीक होने के बाद लॉन्ग कोविड के रूप में ज्यादातर रोगियों में न्यूरोलॉजिकल विकार देखे जा रहें। इसको लेकर संक्रमित और इलाज कर रहे डॉक्टर, दोनों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।

कोविड-19 और न्यूरोलॉजिकल विकार

अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना संक्रमण, फेफड़े-हृदय की दिक्कतों के साथ-साथ कई तरह की न्यूरोलॉजिक समस्याओं के जोखिम को भी बढ़ा रहा है। संक्रमण के दौरान और ठीक होने के बाद भी लोगों में लॉन्ग कोविड के रूप में न्यूरोलॉजिकल समस्याएं देखने को मिल रही हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि भले ही कोरोनावायरस को अब तक सांस की बीमारी के रूप में जाना जाता रहा है, लेकिन यह मस्तिष्क सहित शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर रहा है। शोध में वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क पर कोविड-19 के प्रभावों का अध्ययन किया। इसमें पाया गया कि संक्रमितों में कुछ हफ्तों के बाद से ही दिमाग में हल्के से लेकर गंभीर सूजन की समस्या देखने को मिल रही है।

अध्ययन में क्या पता चला?

जामा न्यूरोलॉजी जर्नल प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, वुहान के अस्पताल में भर्ती करीब 214 कोविड-19 संक्रमितों में से एक-तिहाई में न्यूरोलॉजिकल लक्षण देखे गए। इसमें रोगियों में दौरे पड़ने से लेकर और स्ट्रोक जैसी गंभीर जटिलताओं के मामले भी देखने को मिले। संक्रमितों के ब्रेन ऑटोप्सी में शोधकर्ताओं ने पाया कि वायरस रक्त वाहिकाओं के क्षतिग्रस्त होने और मस्तिष्क की कोशिकाओं में सूजन का कारण बन सकता है। इस खतरे को देखते हुए विशेषज्ञों ने सभी कोरोना संक्रमितों को न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के लक्षणों पर विशेष ध्यान देते रहने की अपील की है।

लॉन्ग कोविड में देखी जा रही हैं दिक्कतें

यूएस सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूरोलॉजिकल समस्याएं लॉन्ग कोविड वाले लोगों में अधिक देखी जा रही है, ये दिक्कतें एक साल से अधिक समय तक बनी रह सकती हैं। कई मामले तो ऐसे भी देखे जा रहे हैं जिसमें लक्षण ठीक होने बाद फिर से वापस आ जा रहे हैं। स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार, लॉन्ग कोविड के न्यूरोलॉजिकल लक्षणों को लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

ऐसे लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक लॉन्ग कोविड में न्यूरोलॉजिकल समस्याओं के रूप में कई लोगों में ब्रेन फॉग (सोचने या ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई), सिरदर्द, नींद की समस्या, खड़े होने पर चक्कर आना, गंध या स्वाद में बदलाव और चिंता बने रहने जैसी दिक्कतें देखी जा रही हैं। संक्रमण की स्थिति के आधार पर इनका प्रभाव और ठीक होने की अवधि अलग-अलग हो सकती है, ऐसे में इन स्थितियों में किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर इलाज जरूर कराएं। इन लक्षणों को अनदेखा करना स्थिति की गंभीरता को बढ़ावा दे सकता है।

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