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बिलासपुर: श्रीराम केयर रेपकांड…अस्पताल प्रबंधन को बचाने केस को दिया जा रहा नया मोड़…पर सवाल यह कि पुलिस क्यों हट रही है पीछे…

बिलासपुर। अमेरी रोड स्थित श्रीराम केयर हॉस्पिटल में इंजीनियरिंग छात्रा के साथ हुए बलात्कार के मामले को नया मोड़ दिया जा रहा है। अब तक आए बयान से साफ हो गया है कि अस्पताल प्रबंधन और सिविल लाइन पुलिस ने हाथ मिला लिया है और दोनों ये दावा कर रहे हैं कि छात्रा के साथ अस्पताल में किसी तरह की जबर्दस्ती नहीं की गई है। पर सूत्रों की मानें तो जो सीसी टीवी की फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराई गई है, वह सीसी टीवी उस बेड को कवर नहीं करती है, जिस बेड पर छात्रा भर्ती थी। श्रीराम केयर हॉस्पिटल रेपकांड पर गौर करें तो प्रबंधन, पुलिस और कुछ चाटूकार छात्रा को ही गलत ठहराने पर आमादा हैं। हालांकि सच्चाई तो छात्रा के होश में आने के बाद ही सामने आएगी।

बिलासपुर नगर निगम से लगे एक गांव की छात्रा को 18 मई को श्रीराम केयर में भर्ती कराया गया था। दो दिन पहले छात्रा ने अपने परिजनों को लिखकर बताया कि उसके साथ अस्पताल में दो लोगों ने रेप किया है। पिता ने इसकी शिकायत सिविल लाइन पुलिस को की। पुलिस अस्पताल पहुंची और खानापूर्ति करती रही। मीडिया में खबर आते ही इस मामले ने सुर्खी पकड़ ली। यहां सिविल लाइन पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध रही। पिता की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय पांच घंटे तक पुलिस जांच-जांच खेलती रही। यह खबर मीडिया में सुर्खिंया पकड़ने के बाद अपने बचाव में पुलिस ने आनन-फानन दो अज्ञात वार्ड ब्वाय के खिलाफ जुर्म भी दर्ज कर लिया। मामला सामने आने के बाद दूसरे दिन लीपापोती शुरू हो गई। जिस दिन छात्रा भर्ती हुई थी, उस दिन से मौन प्रबंधन ने चुप्पी तोड़ी और सारा दोष छात्रा पर मढ़ दिया। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अमित सोनी ने मीडिया के सामने आकर खूब सफाई दी। उनका दावा है कि अस्पताल में उसके साथ किसी तरह की कोई जबर्दस्ती नहीं की गई है। छात्रा ने जहर पी लिया था, जिसके चलते उसे पहले नारायणी अस्पताल ले जाया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण परिजनों ने उसे श्रीराम केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया। डॉ. अमित सोनी का दावा है कि उनके कहने पर पिता ने छात्रा के कमरे की तलाश की, जहां एक कीटनाशक दवा की शीशी मिली, जिसे पीने से छात्रा की हालत बिगड़ी है। जहर काटने के लिए एक ऐसा इंजेक्शन दिया जाता है, जिसके असर से दिगामी संतुलन बिगड़ जाता है। यही इंजीनियरिंग छात्रा के साथ हुआ और उसने दिमागी अंसतुलन के कारण अस्पताल में रेप होना बता दिया है। इस मामले में पुलिस भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है, लेकिन वह अस्पताल प्रबंधन को दोषी मानने को तैयार नहीं है।

छात्रा अपोलो रिफर

श्रीराम केयर में हुए कथित रेपकांड ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने स्वयं इस मामले को संज्ञान में लिया है। उन्होंने कहा है कि यदि छात्रा के साथ ऐसा हुआ है तो कड़ी और सख्त कार्रवाई की जाएगी। शहर विधायक शैलेश पांडेय भी इस मामले को लेकर गंभीर हो गए हैं। वे रविवार सुबह श्रीराम केयर अस्पताल पहुंचे और छात्रा के परिजनों से बातचीत की। उन्होंने सुरक्षा की दृष्टि से छात्रा को अपोलो अस्पताल रिफर कराया। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि यदि छात्रा के साथ रेप हुआ है तो दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए।

सुलगते सवाल

★ जब छात्रा ने जहर पी लिया था, तो प्रबंधन ने पहले इसका खुलासा क्यों नहीं किया।

★ अस्पताल प्रबंधन का दावा है कि उसने मेमो सिविल लाइन थाने भेजा था। फिर सिविल लाइन थाने ने मेमो क्यों स्वीकार नहीं किया।

★ कोनी पुलिस को जहर पीने की सूचना दे दी गई थी तो इतनी गंभीर जानकारी को क्यों छिपा कर रख गया।

★ मीडिया में मामला उजागर होने के बाद ही अस्पताल प्रबंधन और पुलिस क्यों सफाई देते फिर रहे हैं।

★ छात्रा के जहर सेवन के पीछे की सच्चाई क्या है, यह जानने की कोशिश छात्रा के आरोप लगाने के बाद क्यों की जा रही है।

★ पहचान परेड में शिनाख्त होने के बाद भी आखिर पुलिस और अस्पताल प्रबंधन उन वार्ड ब्वॉज को आरोपी मानने से क्यों पीछे हट रही है।

★ इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रही छात्रा के बयान पर आखिर क्यों संदेह किया जा रहा है।

★ गंभीर आरोप लगने के बाद अब अस्पताल प्रबंधन यह क्यों कह रहा कि छात्रा को मासिक धर्म था। इसलिए पेड बदला गया है।

बिलासपुर: श्रीराम केयर हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती इंजीनियरिंग की छात्रा के साथ गैंग रेप…मामले को रफादफा करने चल रहा प्रयास…

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