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नीरव मोदी मामले में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज मार्कंडेय काटजू ने दी गवाही, कहा- भारत में नहीं मिल पाएगा इंसाफ…

सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने शुक्रवार को भारत से लाइव वीडियो लिंक के जरिए भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण के मामले में हीरा कारोबारी की ओर से गवाही दी। शुक्रवार को लंदन की वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट कोर्ट में लाइव सुनवाई के दौरान रिटायर्ड जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा कि, नीरव मोदी को भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं मिलेगा। जस्टिस मार्कंडेय काटजू की गवाही को भारत सरकार की ओर से अभियोजन पक्ष ने चुनौती दी।

पांच दिन की सुनवाई के अंतिम दिन जस्टिस सैमुअल गूजी ने जस्टिस काटजू की विस्तृत गवाही सुनने के बाद मामले की सुनवाई 3 नवंबर तक स्थगित कर दी। तीन नवंबर को वह भारतीय अधिकारियों द्वारा पेश सबूतों की स्वीकार्यता से संबंधित तथ्यों पर सुनवाई करेंगे। नई दिल्ली से 130 मिनट के अपने बयान में काटजू ने आरोप लगाया कि भारत में न्यायिक व्यवस्था चौपट हो गई है। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियां जैसे- सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय राजनीतिक गुरुओं के इशारों पर काम कर रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने कहा कि, भारत के आर्थिक पतन के लिए नीरव मोदी एक “बलि का बकरा” बन गया है, जिस तरह से 1930 के दशक में यहूदियों को नाज़ी जर्मनी में आर्थिक परेशानियों के लिए दोषी ठहराया गया था, और भारत में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होगी। काटजू ने लिखित और मौखिक दावे किये हैं कि भारत में न्यायपालिका का अधिकांश हिस्सा भ्रष्ट है और जांच एजेंसियां सरकार की ओर झुकाव रखती हैं।

काटजू ने अपने आरोपों के समर्थन में कई केस और मुद्दों को रखा, जिनमें 2019 में पूर्व जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच की तरफ से अयोध्या पर दिया गया फैसला शामिल हैं, जिन्हें बाद में राज्यसभा का सदस्य नियुक्त किया गया। इसके साथ ही, उन्होंने रिटायरमेंट के बाद जजों की नियुक्ति, मीडिया ट्रायल और न्यायपालिका में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी रखा। बैरिस्टर हेलेन मैल्कम ने सवाल किया, ”क्या ऐसा संभव है। आप स्वघोषित गवाह हैं, जो कुछ भी बयान दे सकते हैं। इस पर काटजू ने जवाब दिया, आप अपने विचार रखने के हकदार हैं।

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